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Republic Day 2019: भारत के इन 3 राज्यों का अलग संविधान बन सकता था, लेकिन...

भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को उसे अपना संविधान मिला। जिस समय ब्रिटिश भारत छोड़ रहे थे। उस समय भारत में 562 रियासतें थीं। लेकिन बाद मे सिर्फ तीन रियासतों को छोड़कर सभी ने भारत में विलय का फैसला किया। 26 जनवरी 2019 को भारत 69वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। लेकिन इतिहास में ये रियासतें अपना अलग संविधान बनाना चाहते थे। लेकिन इस पर नेहरु जी का कहना था कि अगर यह व्यवस्था ऐसे ही रही तो देश का विकास नहीं हो पाएगा।

Republic Day 2019: भारत के इन 3 राज्यों का अलग संविधान बन सकता था, लेकिन...
भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को उसे अपना संविधान मिला। जिस समय ब्रिटिश भारत छोड़ रहे थे। उस समय भारत में 562 रियासतें थीं। लेकिन बाद मे सिर्फ तीन रियासतों को छोड़कर सभी ने भारत में विलय का फैसला किया। 26 जनवरी 2019 को भारत 69वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। लेकिन इतिहास में ये रियासतें अपना अलग संविधान बनाना चाहते थे। लेकिन इस पर नेहरु जी का कहना था कि अगर यह व्यवस्था ऐसे ही रही तो देश का विकास नहीं हो पाएगा। 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन का अंत होने पर केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और नेहरु जी की नीति के कारण हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ के अलावा सभी रियासतें शान्तिपूर्वक भारतीय संघ में मिल गईं। ये तीनों रियासतें भारतीय संघ मे शमिल नहीं होना चाहती थीं। ये चाहती थीं कि इनका अपना अलग संविधान हो।

इन तीन रियासतों का होता अलग संविधान

हैदराबाद

ब्रिटाश शासन में भी हैदराबाद की अपनी सेना, रेल सेवा और डाक तार विभाग हुआ करता था। उस समय आबादी और कुल राष्ट्रीय उत्पाद की दृष्टि से हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा राजघराना था। उसका क्षेत्रफल 82698 वर्ग मील था जो कि इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कुल क्षेत्रफल से भी अधिक था। हैदराबाद की आबादी का अस्सी फीसदी हिंदू थे।

जबकि अल्पसंख्यक होते हुए भी मुसलमान प्रशासन और सेना में महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए थे। हैदराबाद के निजाम का नाम ओसामा अमी खान आसिफ था। निजाम हैदराबाद को भारत में विलय करने के बिल्कुल खिलाफ था। निजाम अपनी सल्तनत और उसके हुकुम दौर खोना नहीं चाहते थे।वह स्वार्थें की वजह से भारतीय संघ मे शामिल नहीं करना चाहते थे।

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सरदार वल्लमभाई पटेल की पूरी कोशिश के बाद भी निजाम तैयार नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह हुई की उसने पाकिस्तान से हाथ मिला लिया। जिसकी वजह से भारत के पास कोई विकल्प नहीं बचा तो हैदराबाद पर सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया। 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद पर कब्जा कर लिया। भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ऑपरेशन पोलो का नाम दिया गया और हैदराबाद को जीत कर भारतीय संघ में शमिल कर लिया।

कश्मीर

कश्मीर के महाराजा हरी सिंह थे। उनकी जिद थी की वो अपनी रियासत को आजाद रखना चाहते थे। वह चाहते थे कि उनका अलग देश और अलग संविधान हो।उनका मानना था कि अगर कश्मीर भारतीय संघ मे शमिल हो गया तो उनका राज्य फिर से गुलाम बन जाएगा और उनकी सारी शक्तियां चली जाएंगी।
इसी वजह से हरी सिंह अपनी रियासत को भारतीय संघ मे शमिल नहीं करना चाहते थे। उन्होंने स्वतंत्र कश्मीर की घोषणा कर दी। लेकिन पाकिस्तान ने कशमीर पर 22 अक्टूबर 1947 को हमला कर दिया। तो राजा हरी सिंह ने भारतीय सेना की मदद मांगी। भारत ने उन्हें इस शर्त पर मदद दी कि कश्मीर भारतीय संघ में शामिल होगा। महाराजा हरी सिंह इस शर्त पर मान तो गए। लेकिन उन्होंने कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मांगा जिसे संविधान की धारा 370 में दिया गया है।

जूनागढ़

ऐसा कहा जाता है कि जूनागढ़ के नवाब महाबत खान भी जूनागढ़ को एक अलग देश बनाना चाहते थे। महाबत खां जिन्ना से प्रभावित थे। इसलिए वह चाहते थे कि अगर जूनागढ़ स्वतंत्र न हो तो पाकिस्तान में मिल जाए। वहीं नेहरू ने महाबत खां को भारत में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।
महाबत खान की ना नुकुर की वजह से भारतीय सेना ने 9 नवंबर 1947 में जूनागढ़ में घुसकर कब्जा कर लिया। इसके कुछ समय बाद ही जूनागढ़ में 20 फरवरी 1948 को वोटिंग हुई। वोटिंग नागरिकों ने की थी कि वह किस देश में शामिल होंगे। भारत में, पाकिस्तान में या स्वतंत्र रहेंगे। जिसमें नागरिकों ने भारत को चुना।
महाबत खान की मर्जी के विरुद्ध जूनागढ़ रियासत के लगभग 1 लाख से ज्यादा लोगों ने भारत में रहना पसंद किया। ऐसा भी कहा जाता है कि जब जूनागढ़ के नवाब को इस बात का अंदाजा हो गया कि नतीजे उसके खिलाफ आ रहे हैं, तो वो भारत को छोड़कर पाकिस्तान भाग गया। 24 फरवरी को वोटिंग का रिजल्ट आया और जूनागढ़ रियासत भारत का हिस्सा बन गया
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