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रिपोर्ट / देश के पहले जलमार्ग से विकास को मिलेगी गति

सड़क, रेल व वायु मार्ग के बाद अब भारत ने देश के अंदर जलमार्ग को विकसित करने की ओर कदम बढ़ाया है। अर्थव्यवस्था को गति देने में जलमार्ग की बड़ी भूमिका है। देश के अंदर जलमार्ग की प्रचूर क्षमता के बावजूद सरकारों ने न जाने क्यों इस संसाधन का दोहन नहीं किया? देश के अंदर बड़ी नदियों का संजाल है और देश की आधी से अधिक सीमाएं महासागर से जुड़ी हुई हैं, जल के रास्ते मालवहन और यात्रा करना भी रेल व सड़क माध्यमों की अपेक्षा तीन गुना तक सस्ता है, इसके बावजूद सरकारें जलमार्ग विकसित करने के प्रति उदासीन बनी रहीं।

रिपोर्ट / देश के पहले जलमार्ग से विकास को मिलेगी गति
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सड़क, रेल व वायु मार्ग के बाद अब भारत ने देश के अंदर जलमार्ग को विकसित करने की ओर कदम बढ़ाया है। अर्थव्यवस्था को गति देने में जलमार्ग की बड़ी भूमिका है। देश के अंदर जलमार्ग की प्रचूर क्षमता के बावजूद सरकारों ने न जाने क्यों इस संसाधन का दोहन नहीं किया? देश के अंदर बड़ी नदियों का संजाल है और देश की आधी से अधिक सीमाएं महासागर से जुड़ी हुई हैं, जल के रास्ते मालवहन और यात्रा करना भी रेल व सड़क माध्यमों की अपेक्षा तीन गुना तक सस्ता है, इसके बावजूद सरकारें जलमार्ग विकसित करने के प्रति उदासीन बनी रहीं। खैर, देर से ही सही, सरकार की नींद जागी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हल्दिया-बनारस के बीच 1620 किलोमीटर का देश का पहला अंतर्देशीय राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के लिए वाराणसी में देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल को राष्ट्र को समर्पित कर भारत की जल से माल परिवहन की यात्रा की विधिवत शुरूआत कर दी है। मल्टी मॉडल टर्मिनल पर माल की लोडिंग तथा अनलोडिंग के लिए जर्मनी में तैयार हुई दुनिया की अत्याधुनिक हैवी मोबाइल हार्बर क्रेन लगाई गई है।

इस टर्मिनल से मालवाहक जहाजों की आवाजाही 365 दिन हर समय शुरू हो जाएगी। गंगा के इस रूट पर अब मालवाहक जहाज चलेंगे। जहाज से माल ढुलाई के लिए 4 मल्टी मॉडल टर्मिनल (बंदरगाह) - वाराणसी, साहिबगंज, गाजीपुर और हल्दिया बनाए गए हैं। इस रूट पर पहला मालवाहक जहाज ‘टैगोर' ने हल्दिया से बनारस तक का अपना सफर पूरा किया।

आजादी के बाद देश में इनलैंड वॉटरवे पर किसी कंटेनर पोत की यह पहली यात्रा है। यह देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। इसे जलमार्ग विकास परियोजना के तहत तैयार किया गया है, इसमें विश्व बैंक से भी मदद मिली है। कोलकाता से बनारस के बीच राष्ट्रीय जलमार्ग-1 चार राज्यों- उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से गुजरता है और इससे कोलकता, पटना, हावड़ा, इलाहाबाद, वाराणसी जैसे अहम शहर जुड़े हुए हैं।

इस रूट पर कार्गो परिवहन के सुगम होने से इन शहरों व राज्यों में नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे। जिससे देश की जीडीपी में बढ़ोतरी होगी। सरकार की उपेक्षा पूर्ण नीतियों की वजह से पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को वह गति नहीं मिली, जो मिलनी चाहिए थी। जिसके चलते ये राज्य देश की विकसयात्रा में पीछे रह गए हैं।

हल्दिया-बनारस नदी मार्ग आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में सहायक होगा। हल्दिया जलमार्ग के सहारे भारत अपने सागरमाला प्रोजेक्ट के जरिए दक्षिण एशिया के कारोबार में चीन के मुकाबले अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा सकेगा। वर्ष 2015 में सागरमाला प्रॉजेक्ट की शुरुआत हुई है, इसका मकसद भारत में सड़क, रेल, विमान के अलावा बदंरगाहों के जरिए भी आर्थिक रूट बना है,

ताकि देश में कारोबार को गति मिल सके। वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग में बने रामगनर टर्मिनल के जरिए उत्तर भारत पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अन्य पूर्वी-दक्षिणी एशियाई देशों से जुड़ जाएगा। उत्तर भारत में अभी और भी जल परिवहन की संभावनाओं के दोहन की आवश्यकता है।

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