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नोटबंदी: केंद्र-RBI में कम्युनिकेशन की कमी, रिश्ते में तनाव

विभिन्न उपायों को सहजता से लागू करने में दोनों के बीच समन्वय की भी कमी है।

नोटबंदी: केंद्र-RBI में कम्युनिकेशन की कमी, रिश्ते में तनाव
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री के द्वारा नोटबंदी के एलान के बाद से बाद प्रचलन से बाहर किए गए 500 रुपए व 1000 रुपए के कितने पुराने नोट वापस बैंकिंग व्यवस्था में आए हैं, अब रिजर्व बैंक इसकी सूचना छिपाने लगा है। पुराने नोट जमा कराने को लेकर रिजर्व बैंक की तरफ से सवाल-जवाब करने का आदेश वापस ले लिया गया है। नोटबंदी की घोषणा के बाद सरकार और आरबीआइ दोनों के ऊपर इसे सही तरह से जहां लागू करने का दबाव था, वहीं इस दबाव के कारण दोनों के बीच कम्युनिकेशन की कमी खुल कर सामने आ गई है। आरबीआइ और सरकार के सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न उपायों को सहजता से लागू करने में दोनों के बीच समन्वय की भी कमी है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को यूटर्न लेते हुए पहले जारी की गई अपनी अधिसूचना को निरस्त कर दिया है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। अब एक बार पुराने नोट जमा कराने पर बैंक अधिकारियों की तरफ से कोई सवाल-जवाब नहीं किया जाएगा। इससे साफ पता चलता है कि केंद्र और आरबीआइ में समन्वय की कमी है।
अभी हाल ही का मामला है, 20 दिसंबर के बाद 5,000 से ऊपर के पुराने नोटों को जमा कराने को लेकर रखी गई शर्तों की अधिसूचना से जुड़ा है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से बातचीत में सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आरबीआइ ने अधिसूचना को बहुत 'खराब तरीके से ड्राफ्ट' किया था, विशेषकर उस सेक्शन को जिसमें अमान्य कर दिए गए नोटों को डिपॉजिट करने में हुई देरी की वजहें पूछी गई थीं।
बार-बार बदलाव से आरबीआइ की छवि खराब
वहीं, आरबीआइ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सर्कुलर में हो रहे बार-बार बदलाव से आरबीआइ की छवि खराब हुई है, जो बदलाव अधिकांशतः केंद्र सरकार के निर्देश पर किया जा रहा है। वहीं सरकार में कुछ लोगों का मानना है कि आरबीआइ किसी भी तरह के निर्देश पर बहुत धीरे प्रतिक्रिया दे रहा है।
शादी वाले परिवार को 2.5 लाख रुपए वाला नियम
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने शादी वाले परिवार को 2.5 लाख रुपए की रकम देने की मंजूरी के नियमों को तैयार करने में तीन दिन का वक्त ले लिया। वहीं, जब आरबीआई इस नियम के साथ आया तो यह इतना कठोर था कि पैसा निकालना लगभग असंभव था। सरकार को इसमें कदम उठाना पड़ा और उसके बाद आरबीआई ने एक शर्त कम की।
नोटों के आंकड़े को लेकर आरबीआइ और केंद्र के बीच मतभेद
झगड़े की एक अन्य वजह बैंक में वापस आए पुराने नोट भी थे। बैकों को डिपॉजिट किए गए नोटों के आंकड़े को लेकर आरबीआइ और केंद्र के बीच मतभेद थे। पिछले सप्ताह आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने आरबीआई और बैकों से नोटों को दोबारा जांचने को कहा था।
केंद्रीय बैंक दो तरह के लोगों के बीच बंट गई
आरबीआइ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय बैंक दो तरह के लोगों के बीच बंट गई है पहली वो जो संस्थान के साथ हो रहे व्यवहार से नाराज हैं और दूसरे वो जो वित्त मंत्रालय के आदेश को खुशी से स्वीकार कर रहे हैं।
जांचने से बैंक का काम प्रभावित
आरबीआइ सूत्रों का यह भी कहना है कि बैकों और बैंकिंग सिस्टम को डिपॉजिटर के टैक्स से जुड़ी चीजों को देखने के लिए बाध्य करना अनुचित है। यह सिर्फ आरबीआइ का अकेले का काम नहीं है। हर बैकिंग ट्राजैक्शन में टैक्स से जुड़ी चीजों को जांचने से बैंक का काम प्रभावित होगा।
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