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कम हो सकती है इन हैंड सैलरी!, सरकार ने रखा प्रस्ताव

नियोक्ताओं के कुल योगदान में से 3.67 प्रतिशत ईपीएफ में, 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना तथा 0.5 प्रतिशत कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना में जाता है।

कम हो सकती है इन हैंड सैलरी!, सरकार ने रखा प्रस्ताव
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नई दिल्ली.सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में अंशदान की कटौती के लिए वेतन में सभी भत्तों को शामिल करने का प्रस्ताव किया है। इसके लागू होने से संगठित क्षेत्र के नियोक्ताओं के साथ-साथ कर्मचारियों को इस योजना में ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

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इस संबंध में तैयार विधेयक के मसौदे में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के अंशदान के आकलन के उद्देश्य से वेतन की नई परिभाषा प्रस्तावित की गई है। इसके तहत वेतन में मूल वेतन और भत्तों को शामिल किया जाएगा। फिलहाल, भविष्य निधि देनदारी का आकलन कर्मचारियों के मूल पगार के आधार पर किया जाता है जिसमें केवल मूल वेतन तथा महंगाई भत्ते को शामिल किया जाता है।

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कर्मचारी अपने मूल वेतन का 12 प्रतिशत ईपीएफ में योगदान करता है और उतनी ही राशि का योगदान नियोक्ता की तरह से किया जाता है। नियोक्ताओं के कुल योगदान में से 3.67 प्रतिशत ईपीएफ में, 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना तथा 0.5 प्रतिशत कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना में जाता है। कर्मचारी भविष्य निधि विविध प्रावधान कानून 1952 में संशोधन के लिए लाए जा रहे विधेयक के मसौदे के अनुसार वेतन का मतलब सभी भत्ते या परिलब्धियां हैं जिसमें कर्मचारियों को नकद में दिए जाने वाले सभी भत्ते शामिल हैं।

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विधेयक को दिया जा रहा अंतिम रूप

भारतीय मजदूर संघ तथा ईपीएफओ न्यासी बृजेश उपाध्याय ने कहा, ‘नियोक्ता अपनी भविष्य निधि देनदारी कम करने के लिए कर्मचारियों के वेतन को कई भत्तों में बांट देते हैं। विधेयक में वेतन की प्रस्तावित परिभाषा से इस प्रकार की चीजों पर रोक लगेगी।’ बृजेश उपाध्याय ने कहा कि र्शम मंत्रालय विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इस संबंध में त्रिपक्षीय विचार-विर्मश हुआ और ट्रेड यूनियनों, कर्मचारियों के प्रतिनिधियों तथा सरकारी निकायों ने अपने विचार दिए।

आसानी से वित्त उपलब्ध होगा

वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि र्शम मंत्रालय ने र्शमिक बैंक पर काम करने को लेकर एक समिति गठित करने का निर्णय किया है। इसका मकसद अपने सदस्यों को आसान वित्त उपलब्ध कराना तथा उसके निवेशों को प्रबंधित करना है। र्शम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने ईपीएफओ न्यासियों की 11 मार्च को हुई बैठक में समिति गठित करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, अधिसूचना ठंडे बस्ते में पड़ी थी-

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