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शिवसेना के एनडीए से अलग होने की ये है मुख्य वजह, टूटा 25 साल पुराना रिश्ता

भारतीय जनता पार्टी एवं शिवसेना के रिश्तों में चल रहे उतार-चढ़ाव पर मंगलवार को विराम लग गया।

शिवसेना के एनडीए से अलग होने की ये है मुख्य वजह, टूटा 25 साल पुराना रिश्ता

भारतीय जनता पार्टी एवं शिवसेना के रिश्तों में चल रहे उतार-चढ़ाव पर मंगलवार को विराम लग गया। 25 साल से ज्यादा तक एनडीए गठबंधन में शामिल महाराष्ट्र की प्रमुख पार्टी शिवसेना ने मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 2019 में अलग से लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय किया है।

शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कार्यकारिणी में बोलते हुए 2019 का लोकसभा चुनाव अलग से लड़ने का फैसला किया है।

सामना में मोदी-फडनवीस सरकार विरोधी लेख

दरअसल शिवसेना और भाजपा के बीच ये तल्खी केन्द्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद से ही शुरू हो गई थी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शिवसेना को उम्मीद के मुताबिक मंत्रालय एवं मंत्री नही मिलने की वजह से ये मतभेद शुरू हुआ। इस मतभेद की वजह से शिवसेना के मुख्यपत्र 'सामना' में भी मोदी सरकार के फैसलों के विरोध में लेख छपते रहे।

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सरकार के फैसलों पर सवाल

शिवसेना ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर भी सवाल उठाया था। महाराष्ट्र के किसानों का मुद्दा रहा हो या शिक्षा एवं बेरोजगारी का मुद्दा रहा हो, शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ केन्द्र सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव

यही नहीं शिवसेना ने 2015 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज्य में गठबंधन को तोड़कर अलग से चुनाव भी लडने का फैसला किया था। भारतीय जनता पार्टी इस विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत से दूर थी।

शिवसेना नंबर दो की पार्टी बनकर रह गई, इसी बीच शरद पवार की एनसीपी ने महाराष्ट्र में भाजपा को बिना किसी शर्त के बाहर से समर्थन का ऐलान किया था। शिवसेना ने इसी बात पर एक बार फिर से भाजपा के करीब आई और महाराष्ट्र में मिलकर सरकार बनाने का निर्णय लिया।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव

महाराष्ट्र में पिछले साल हुए निकाय चुनावों में एक बार फिर से दोनों ही पार्टियां अलग होकर लड़ी। भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसके बाद शिवसेना ने फिर से मुंबई नगर निगम में भाजपा के समर्थन से काबिज हुई। ऐसे बहुत से मौके आए जिसमें इन दोनों सहयोगियों के बीच की तल्खी को देखा गया।

आदित्य ठाकरे का भाजपा पर हमला

शिवसेना लगातार केन्द्र की मोदी सरकार पर लगातार हमलावर बनी हुई थी। पिछले महीने ही युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने मुंबई से 240 किलोमीटर दूर अहमदनगर जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सरकार से बाहर होने के बाद शिवसेना अपने दम पर सरकार बनाएगी।

साथ में उन्होंने यह भी कहा कि 'शिवसेना एक साल के अंदर सरकार से बाहर हो जाएगी और फिर अपने बलबूते पावर में लौटेगी।' उन्होंने कहा कि सरकार से बाहर होने का समय उद्धव ठाकरे तय करेंगे।

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'घोटालेबाज भाजपा' शीर्षक वाली किताब

शिवसेना के एक नेता ने 'घोटालेबाज भाजपा' नाम से एक शीर्षक प्रकाशित की एवं अपने पार्टियों के नेताओं के बीच वितरित की। इस घटना ने भी इन दोनों पार्टियों के बीच की खाई को और बढ़ा दिया। हालांकि बाद में शिवसेना के ही एक नेता ने इस मामले में पार्टी को अलग कर लिया और कहा कि ये पुस्तिका लेखक का निजी विचार है और यह पार्टी द्वारा संकलित आधिकारिक पुस्तिका नहीं है।

संजय राउत का इंटरव्यू- 'मोदी लहर अब फीकी पड़ गई है'

शिवसेना के राज्यसभा में सांसद संजय राउत मे एक टीवी इंटरव्यु के दौरान कहा कि मोदी लहर अब फीकी पड़ गई है, जिसपर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कड़ी आपत्ति जताई और कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि शिवसेना अपना स्टैंड क्लियर कर लें, उनका दोहरा रुख अब छुप नहीं सकता है, सेनाप्रमुख उद्धव ठाकरे को ये तय कर लेना चाहिए कि भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखना चाहते हैं या नहीं।

उद्धव ठाकरे-देवेन्द्र फडनवीस के बीच जुबानी जंग

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव का प्रचार के दौरान शिवसेन प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हमले तेज करते हुए अपनी इस पूर्व सहयोगी को पार्टी को 'कोबरा' कहा था। शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा के बारे में कहा, "हमारा गठबंधन पिछले 25 साल से कोबरा के साथ था, जो कि अब अपना फन निकाल रहा है। मैं जानता हूं, इसे कैसे कुचला जाता है।"

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