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''आरबीआई'' जारी करेगा 50 डिफॉल्टर कंपनियों की लिस्ट

सरकारी बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन पर चर्चा के दौरान ऐसे अकाउंट्स की नई लिस्ट की बात सामने आई।

आरबीआई जल्द ही कर्ज चुकाने में आनाकानी करने वाली 50 कंपनियों की नई लिस्ट जारी कर सकता है। इन कंपनियों के कर्ज को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स की कैटिगरी में जल्द डाला जा सकता है।

फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक अधिकारी का कहना है, कि भारतीय रिजर्व बैंक इन अकाउंट्स के बारे में रेजॉलूशन का कोई रास्ता निकालने या कर्जदारों के खिलाफ बैंकरप्सी की कार्यवाही शुरू करने के लिए बैंकों के सामने 31 मार्च की डेडलाइन तय कर सकता है।

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ये उन 41 अकाउंट्स से अलग हैं, जिनकी पहचान आरबीआई पहले ही कर चुका है, और जिनमें से कई के बारे में बैंकों ने बैंकरप्सी की कार्यवाही शुरू कर दी है। सरकारी बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन पर चर्चा के दौरान ऐसे अकाउंट्स की नई लिस्ट की बात सामने आई।

अधिकारी ने बताया कि आरबीआई की ओर से चिह्नित इन एसेट्स को 2.1 लाख करोड़ रुपए के बैंक रीकैपिटलाइजेशन प्लान में शामिल किया गया था, लिहाजा बैंकों की कैपिटल रिक्वायरमेंट का जो अंदाजा लगाया गया था, रकम उससे ज्यादा नहीं बढ़ेगी।

5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज बकाया

जून के अंत में सरकारी बैंकों के 7.33 लाख करोड़ रुपये बतौर एनपीए फंसे हुए थे। इसके चलते कर्ज देने की उनकी क्षमता प्रभावित हो रही है। संदिग्ध अकाउंट्स के लिए बड़ी प्रोविजनिंग के कारण कई बैंकों को बड़ा घाटा भी दर्ज करना पड़ा है।

आरबीआई ने जिन 41 अकाउंट्स की पहचान की है, उनमें से अधिकतर को लेंडर्स ने बैड लोन के रूप में क्लासिफाई कर लिया है और समयबद्ध हल निकालने के कदम उठा लिए हैं। मई में आरबीआई ने 12 स्ट्रेस्ड अकाउंट्स की पहचान की थी।

इनमें से हर एक में 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज बकाया था। कुल मिलाकर इनमें फंसी रकम बैंकों के टोटल एनपीए का 25 पर्सेंट थी। आरबीआई ने इन अकाउंट्स का मामला बैंकरप्सी लॉ के तहत हल करने के लिए भेजा था।

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