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नोटबंदी: लोगों को नहीं मिली राहत, रेपो रेट बरकरार

रेपो रेट में कटौती से ग्राहकों के लिए ईएमआइ कम हो सकती थी।

नोटबंदी: लोगों को नहीं मिली राहत, रेपो रेट बरकरार
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नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद अपनी पहली मॉनीटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) में उम्‍मीदों के विपरीत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआइ नेे रेपो रेट और सीआरआर को पुराने लेवल पर ही बरकरार रखा है। ऐसे में रेपो रेट 6.25 फीसदी और सीआरआर 4 फीसदी पर बना रहेगा। आरबीआइ का यह कदम आम आदमी से लेकर इंडस्‍ट्री और स्‍टॉक मार्केट सबके लिए निराशाजनक रहा है। आरबीआइ गवर्नर ने कहा कि ‘चलनिधि समायोजन सुविधा के तहत रेपो रेट को 6.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया गया है। जबकि आरबीआइ गवर्नर उ‍र्जित पटेल की अध्‍यक्षता वाली कमेटी से ब्‍याज दरों में कटौती की उम्‍मीद की जा रही थी।
नोटबंदी का असर
जनसत्ता और भास्कर की खबर के मुताबिक, आरबीआइ ने अपनी पॉलिसी में इकॉनमी की ग्रोथ रेट का अनुमान घटा दिया है। आरबीआई ने वित्‍त वर्ष 2016 17 के लिए अपनेे पहले के अनुमान 7.6 फीसदी ग्रोथ रेट को घटा कर 7.1 फीसदी कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि आरबीआई नोटबंदी का असर इकॉनमी पर नकारत्‍मक तौर पर देख रहा है। आरबीआई ने बुधवार को पेश मॉनीटरी पॉलिसी में बैंकों के लिए 100 फीसदी इन्‍क्रीमेंटल सीआरआर की लिमिट को हटा दिया है। अब बैंकों को अपने यहां होने वाले डिपॉजिट के अनुपात में पूरी रकम सीआरआर के रूप में रिजर्व नहीं रखनी पड़ेगी। आरबीआइ का यह कदम बैंकों में लिक्विडिटी बढ़ाएगा। इससे पहले आरबीआइ ने 26 नवंबर को बैंकों में बढ़ती लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए 100 फीसदी इन्‍क्रीमेंटल सीआरआर की लिमिट तय की थी।
2018 तक बरकरार रह सकता नोटबंदी का असर
आपको बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को किए गए 500, 1000 रुपए के नोट बंद करने के फैसले से भारत कैश-आधारित अर्थव्‍यवस्‍था को चोट पहुंची है। ऐसे में अगर 25 बेसिस प्‍वाइंट की कटौती भी करता तो रेपो रेट करीब 6 प्रतिशत कम हो जाता, जो कि सितंबर 2010 के बाद का न्‍यूनतम स्‍तर होता। रेपो रेट में कटौती से ग्राहकों के लिए ईएमआइ कम हो सकती थी। वहीं विशेषज्ञों ने चेताया है कि नोटबंदी का असर 2018 तक बरकरार रह सकता है। जुलाई और सितंबर के बीच हमारी अर्थव्‍यवस्‍था 7.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है। ओपेक देशों ने उत्‍पादन कम करने का ऐलान कर दिया है। इसके घरेलू वृद्धि पर असर को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।
सेंसेक्‍स में गिरावट
सेंसेक्स बुधवार को शुरूआती कारोबार में 77 अंक चढ़ गया। मौद्रिक नीति की समीक्षा में दरों में कटौती की उम्मीद और स्थिर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों के बीच लिवाली का दौर चलने से शेयर बाजार में तेजी देखी गई। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपया के मजबूत रहने से भी शेयर बाजार को समर्थन मिला। हालांकि जैसे ही रेपो रेट में कोई परिवर्तन न होने का ऐलान हुआ, सेंसेक्‍स में गिरावट देखी गई। 500, 1000 रुपए के नोट बंद होने से बैंकों के जमा में तेजी से इजाफा हुआ है। आ‍र्थ‍िक विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सरकार रकम निकालने की सीमा बढ़ा भी देती है तो भी बैंकों के पास जमा कुल रकम करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए तक बढ़ सकती है।
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