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ये हैं रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा की 10 मुख्य बातें, ऐसे समझें पूरा गणित

रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जबकि आर्थिक वृद्धि अनुमान 6.7 प्रतिशत पर रखा पूर्ववत रखा है।

ये हैं रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा की 10 मुख्य बातें, ऐसे समझें पूरा गणित

रिजर्व बैंक ने आने वाले दिनों में महंगाई दर बढ़ने की चिंता में नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया। केन्द्रीय बैंक ने रेपो दर को 6 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा है। इससे बैंकों के समक्ष ब्याज दरों में कमी लाने की गुंजाइश काफी कम रह गई है। इसके परिणामस्वरूप वाहन और मकान के लिये कर्ज सस्ता होने की भी गुंजाइश कम रह गई है।

रिजर्व बैंक ने आज जारी अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में वर्ष की दूसरी छमाही के लिये मुद्रास्फीति का अनुमान पहले के 4.2-4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.3- 4.7 प्रतिशत कर दिया। हालांकि, बैंक ने 2017-18 के लिये आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा है।

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भारतीय रिजर्व बैंक की 2017-18 में पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा की मुख्य बातें

  • प्रमुख नीतिगत दर रेपो 6 प्रतिशत पर कायम।
  • रिवर्स रेपो दर 5.75 प्रतिशत पर बरकरार।
  • सीमान्त स्थायी सुविधा दर और बैंक दर 6.25 प्रतिशत।
  • एमपीसी ने 5-1 के वोट से किया दरों पर फैसला।
  • तीसरी और चौथी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 4.3 से 4.7 प्रतिशत किया गया।
  • एमपीसी का टिकाऊ आधार पर मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के आसपास कायम रखने का लक्ष्य।
  • चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत पर कायम।
  • रिजर्व बैंक ने राजकोषीय मोर्चे पर लक्ष्य से चूकने के खजरे के प्रति आगाह किया।
  • एमपीसी की अगली बैठक 6 और 7 फरवरी, 2018 को।

रिवर्स रेपो रेट

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने इस वित्त वर्ष की पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य नीतिगत दर रेपो को 6 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा है। रिवर्स रेपो दर को भी 5.75 प्रतिशत पर बनाये रखा है।

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खुदरा मुद्रास्फीति दर

केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि उसका लक्ष्य खुदरा मुद्रास्फीति दर को मध्यम काल में 4 प्रतिशत के आसपास बनाये रखना है। यह ज्यादा से ज्यादा दो प्रतिशत ऊपर अथवा नीचे तक जा सकती है। रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति अनुमान बढ़ाते हुये इसमें सरकारी कर्मचारियों के आवास किराया भत्ता (एचआरए) में बढोतरी से पड़ने वाले असर को शामिल किया है।

मुद्रास्फीति पर असर

उसके मुताबिक सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत एचआरए बढ़ने से मुद्रास्फीति पर 0.35 प्रतिशत तक का असर हो सकता है। उसके मुताबिक एचआरए बढ़ने का महंगाई पर असर दिसंबर में अपने शीर्ष पर होगा। विभिन्न राज्यों में एचआरए बढ़ाये जाने का भी मुद्रास्फीति पर असर दिखाई देगा।

जोखिम

समीक्षा में कहा गया है, ‘‘खाद्य और ईंधन उत्पादों को छोड़कर मुद्रास्फीति में 2017-18 की पहली तिमाही में जो मुद्रास्फीति में नरमी आई थी उसमें अब बदलाव आया है। इसमें जो वृद्धि का रुख बना है उसके निकट भविष्य में बने रहने का जोखिम है।

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