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रैट होल माइनिंग क्या है, जिसकी वजह से खतरे में है 15 मजदूरों की जान

मेघालय की एक कोयला खदान में 13 दिसंबर से करीब 15 मजदूर फंसे हुए हैं। उन्हें बचाने की कोशिशें जारी है। खदान में पानी भर जाने के कारण बचाव अभियान में दिक्कतें आ रही हैं। बचाव दल को यह जानकारी भी नहीं है कि अंदर फंसे मजदूर आखिर किस हालत में हैं। सवाल यह उठता है कि ये लोग खदान में फंस कैसे गए। तो उसका एक कारण है रैट होल माइनिंग (Rat Hole Mining)। रैट होल माइनिंग क्या है (What Is Rat Hole Mining) इसके बारे में जानने से पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर भारत में कोयला कहां-कहां पाया जाता है।

रैट होल माइनिंग क्या है, जिसकी वजह से खतरे में है 15 मजदूरों की जान

मेघालय की एक कोयला खदान में 13 दिसंबर से करीब 15 मजदूर फंसे हुए हैं। उन्हें बचाने की कोशिशें जारी है। खदान में पानी भर जाने के कारण बचाव अभियान में दिक्कतें आ रही हैं। बचाव दल को यह जानकारी भी नहीं है कि अंदर फंसे मजदूर आखिर किस हालत में हैं। सवाल यह उठता है कि ये लोग खदान में फंस कैसे गए। तो उसका एक कारण है रैट होल माइनिंग (Rat Hole Mining)। रैट होल माइनिंग क्या है (What Is Rat Hole Mining) इसके बारे में जानने से पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर भारत में कोयला कहां-कहां पाया जाता है।

भारत में कोयला

भारत में कोयला अधिकमत पूर्व की ओर पाया जाता है। तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्य असम, मेघालय में भारत के कोल रिजर्व हैं। असम और मेघालय में कोयले की माइनिंग उस तरह से नहीं की जा सकती जैसे छत्तीसगढ़ या झारखंड में होती है।

क्योंकि इन राज्यों में समतल भूमि है वहीं पूर्वोत्तर में पहाड़ हैं। जिसके कारण खुले में खनन नहीं किया जा सकता। साथ ही इन राज्यों के कोयले में भारी मात्रा में सल्फर पाया जाता है। जो कि बेहद खराब क्वालिटी का माना जाता है। मेघालय में करीब 64 करोड़ टन कोयला का भंडार है।

रैट होल माइनिंग क्या है (What Is Rat Hole Mining)

मेघालय एक पहाड़ी इलाका है। साथ ही यहां पर कोयला भी ज्यादा अच्छी मात्रा में नहीं मिलता। बाकी के राज्यों में कोयला निकलने के लिए सुरंग बनाई जाती है। सुरंग को पिलर (खंभे) के सहारे सपोर्ट दिया जाता है। ताकि सुरंग ढह न जाए। अब इस तरह से सुरंग खोदना काफी महंगा पड़ता है।

ज्यादा खर्च और अच्छी क्वालिटी का कोयला न होने के कारण मेघालय में इस तरह से सुरंग नहीं बनाए जाते हैं। मेघालय में लोगों ने कोयला निकालने का एक तरीका खोजा जिसे रैट होल माइनिंग (Rat Hole Mining) कहते हैं।

रैट होल माइनिंग में लोग पहाड़ में एक छेद करते हैं। यह छेद करीब 3 से 4 फीट ऊंचा होता है। फिर उस छेद को अंदर की तरफ खोदते जाते हैं। इस काम में ज्यादातर बच्चों का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि वह आसानी से इस छेद में घुस सकते हैं।

रैट होल माइनिंग दो तरह की होती है पहली है साइड कटिंग (Side Cutting) दूसरी बॉक्स कटिंग (Box Cutting) लेकिन यह दोनों ही गैर कानूनी है। फिलहाल इस तरह के खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पूरी तरह रोक लगा रखी है।

इसका पहला कारण यह है कि यह बेहद असुरक्षित है दूसरा कारण यह है कि यह प्रकृति के लिए भी नुकसानदेह है। पिछले साल करीब 6 मिलियन टल कोयला मेघालय से निकला था। जिसमें से करीब 95 प्रतिशत कोयला रैटहोल माइनिंग से निकला है। रैट होल माइनिंग सिर्फ मेघालय में होती ही।

दूसरे राज्यों में क्यों नहीं होती रैट होल माइनिंग

दूसरे राज्यों में रैटहोल माइनिंग नहीं की जाती क्योंकि अन्य राज्यों में कोयले की काफी मोटी परते हैं। इसलिए अगर छत्तीसगढ़ या झारखंड में कोयला निकानला है तो खुले में निकाला जाएगा। जबकि मेघालय में कोयले की काफी पतली परत है। उसके बाद पत्थर की परत है। मेघालय में कोयला कई परतों में पाया जाता है। इस लिए यह एक और कारण है कि मेघालय में खुले में खनन करना फायदेमंद नहीं होगा।

प्रकृति को कैसे नुकसान पहुंच रहा है

मेघालय की सरकार जानती है कि रैट होल माइनिंग गैरकानूनी और खतरनाक है। वह यह भी जानती है कि रैटहोल माइनिंग को किया भी जा रहा है। लेकिन वह इसे रोकना नहीं चाहती है। क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया ही गैरकानूनी है।

इसी लिए इस प्रक्रिया से निकले कोयले को साफ करना बेहद मुश्किल हो जाता है। लोग रैट होल माइनिंग (Rat Hole Mining) से निकले कोयले को किसी नदी के किनारे रख देते हैं। जिससे कोयले में मौजूद सल्फर नदी के पानी में घुल जाता है। मेघालय की कोपिली नदी इसी वजह से दूषित हो गई है।

मेघालय में कैसे फंसे मजदूर

रैट होल माइनिंग करने के लिए सुरंगों को काफी गहरा खोदा जाता है। इसमें घुसना जितना मुश्किल है उतना ही बाहर निकलना भी मुश्किल है। 13 दिसंबर को मजदूर जब सुरंग में घुसे तो उस समय बारिश होने लगी जब तक वो बाहर निकलते तब तक सुरंग में पानी भर गया जिसके कारण वह बाहर नहीं निकल पाए। बताया जा रहा है कि फंसे हुए 15 मजदूरों में ज्यादातर कम उम्र के ही हैं।

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