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रोहिंग्या जैसी हालत हो गई है तमिल के लोगों की, श्रीलंका के सैनिक कोठरी मे कैद करके करते हैं शोषण

तमिल नागरिक ने अपनी टांगों पर सिगरेट से दागे जाने के 60 से अधिक निशान दिखाए।

रोहिंग्या जैसी हालत हो गई है तमिल के लोगों की, श्रीलंका के सैनिक कोठरी मे कैद करके करते हैं शोषण

श्रीलंका में रह रहे तमिल नागरिकों द्वारा यूरोप में शरण मांगने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब इसके पीछे की वजह सामने आई है।

एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में मुताबिक श्रीलंका की आर्मी और पुलिस तमिल नागरिकों के साथ बर्बर बर्ताब करती है। शरण मांगने वाले इन तमिल लोगों ने श्रीलंका की आर्मी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

रिपोर्ट में तमिल नागरिकों ने अपने साथ श्रीलंकाई आर्मी और पुलिस के रेप, मारपीट और टॉर्चर का खुलासा किया है। एजेंसी की जांच में अधिकतर तमिलो नागरिकों ने आरोप लगाए कि आर्मी और पुलिस उन्हें तमिल टाईगर्स से जुड़ा बताकर टॉर्चर करती रहती है।

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रिपोर्ट के सामने आने के बाद श्रीलंका की सरकार ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

वहीं तमिल नागरिकों का कहना है कि उनका रेप करके गर्म सलाखों से पीटा जाता है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, एक नागरिक ने बताया कि उसको 21 दिन तक एक कमरे में बंद करके रखा गया जहां उसका 12 बार रेप हुआ। इस दौरान उसने शरीर पर सिगरेट से जले और रॉड से पीटने के निशान भी दिखाए।

19 साल के एक दूसरे तमिल नागरिक ने अपनी टांगों पर सिगरेट से दागे जाने के 60 से अधिक निशान दिखाए। उसने बताया कि उसे छोटे सी कोठरी में रखा गया, जहां उससे रेप भी किया गया।

आजाद राज्य की मांग को लेकर तमिल और सिंहला सरकार के बीच करीब 26 सालों तक लड़ाई चली है। श्रीलंका में गृहयुद्ध को खत्म हुए करीब आठ साल बीत चुके हैं।

तमिल विद्रोहियों के संगठन लिट्टे को श्रीलंका सरकार ने आतंकी संगठन घोषित किया था। अब रिपोर्ट में सामने आया है कि संगठन से जुड़े होने के नाम पर श्रीलंका की आर्मी तमिलों पर अत्याचार करती है।

श्रीलंका में 26 साल तक चले घमासान के बाद 2009 में सिविल वार खत्म हुआ। श्रीलंका में गृहयुद्ध को खत्म हुए करीब आठ साल बीत चुके हैं।

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तमिल विद्रोहियों के संगठन लिट्टे को श्रीलंका सरकार ने आतंकी संगठन घोषित किया था। अब रिपोर्ट में सामने आया है कि संगठन से जुड़े होने के नाम पर श्रीलंका की आर्मी तमिलों पर अत्याचार करती है।

अब पूरे मामले के चर्चा में आने के बाद तमिल लोगों का कहना है कि वह दुनिया को बताना चाहते हैं कि श्रीलंका में उनके साथ क्या हो रहा है। तमिल लोगों के मुताबिक, उनको श्रीलंका में दूसरे दर्जे के लोग समझा जाता है। मामले के बढ़ने के बाद श्रीलंका की सरकार ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करवाएगी।

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