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राम मंदिर मामले में कांग्रेस से अमित शाह ने किया ये करारा सवाल

राम मंदिर मामले में भाजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस को भी अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या नहीं इसपर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

राम मंदिर मामले में कांग्रेस से अमित शाह ने किया ये करारा सवाल

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मामले में आज सुप्रेमें कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 8 फरवरी 2018 को सुनवाई करने का फैसला किया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सीधे राहुल गांधी से पूछा है कि राम मंदिर को लेकर कांग्रेस और आपका क्या स्टैंड है, आप स्पष्ट कीजिए...? भाजपा चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द इस मामले में सुनवाई करे और अपना फैसला सुनाए। क्योंकि ये देश की आस्था से जुड़ा हुआ मामला है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अयोध्या राम मंदिर के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई टाले जाने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि कपिल सिब्बल की दलीलें हैरान करने वाली हैं, कांग्रेस और राहुल गांधी को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा एक भव्य राम मंदिर की पक्षधर है। शाह ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के नेता और सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से आश्चर्यजनक दलील रखते हुए कहा कि 2019 के आम चुनावों के खत्म होने तक सुनवाई टाल देना चाहिए।

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जब भी कांग्रेस को ऐसे मामलों में अपना रुख रखना होता है तो कपिल सिब्बल को आगे किया जाता है। कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे कपिल सिब्बल की बातों से सहमत हैं या नहीं। जब सभी कागजात तैयार हैं, तो सुनवाई टालने का क्या मतलब है।'

अमित शाह ने राहुल गांधी से जवाब मांगते हुए कहा,एक तरफ तो कांग्रेस के आगामी अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में मंदिरों का दौरा कर रहे हैं, तो वहीं कपिल सिब्बल कोर्ट में ऐसी बातें कर रहे हैं। मैं कांग्रेस पार्टी से अपील करता हूं कि उन्हें इस मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए।'

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भाजपा की मांग सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पूरी कर जल्द सुनाए फैसला

शाह ने कहा,भाजपा की यह मांग है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाए। भाजपा अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर के निर्माण की पक्षधर है।'

गौरतलब है कि कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी 2018 की तारीख दे दी। अब इस मामले में 8 फरवरी से सुनवाई शुरू होगी। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी वकीलों को कहा कि इस मुकदमे से जुड़े सभी दस्तावेजों को पूरा करें ताकि मामले की सुनवाई ना टाली जाए।

इस मामले में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वकीलों को रजिस्ट्री से संपर्क करने का निर्देश दिया गया है। पीठ ने एक पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के इस आग्रह को बहुत गंभीरता से लिया कि इन अपीलों पर अगले लोक सभा चुनाव के बाद जुलाई, 2019 में सुनवाई कराई जाए क्योकि मौजूदा माहौल अनुकूल नहीं है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील का पुरजोर विरोध किया कि दस्तावेजों से संबंधित काम पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि हर चीज का अनुपालन किया जा चुका है और ये मामले सुनवाई के लिये तैयार हैं।

राम मंदिर पर इलाहाबाद हाई कोर्टक फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर 2010 को 2:1 के बहुमत से अपनी व्यवस्था में विवादित भूमि को तीनों पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाडा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।

स्वामी चिन्मयानन्द का कांग्रेस पर हमला

वहीँ राम जन्मभूमि न्यास कोर समिति के सदस्य स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि कांग्रेस चाहती तो सोमनाथ मंदिर की तरह अयोध्या में भी मंदिर का निर्माण हो गया होता।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी मंदिर मुद्दे के समाधान के लिए एक वर्ष का समय मांगा था, मगर उन्होंने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए। ऐसे में राम मंदिर का मुद्दा उलझता ही चला गया।

स्वामी ने कहा कि इसके लिए केवल कांग्रेस ही जिम्मेदार है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के पक्ष में ही आएगा और जल्द ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा।

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