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पीएम मोदी से मिले राजनाथ, कश्मीर पर बनी नई रणनीति!

श्रीनगर में हुर्रियत नेताओं से मिलने पहुंचे कुछ सांसदों को बैरंग लौटाये जाने से राजनाथ नाखुश

पीएम मोदी से मिले राजनाथ, कश्मीर पर बनी नई रणनीति!
नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सांसदों के सर्वदलीय दल के दो दिन के दौरे के कश्मीर दौरे के बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में पूरी जानकारी दी। मंगलवार सुबह ही राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
20 पार्टियों के 26 सांसदों के दल का नेतृत्व करने वाले राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि दौरा विफल रहा। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राजनाथ सिंह राज्य ने जमीनी हालात के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के आकलन की जानकारी पीएम मोदी को दी है।
प्रधानमंत्री वियतनाम और चीन की यात्रा के बाद सोमवार रात राजधानी लौट आए हैं। सोमवार की शाम गृहमंत्री भी जम्मू कश्मीर के दौरे से वापस लौट आए हैं। सूत्रों ने बताया कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य दो दिवसीय यात्रा के निष्कर्षों पर चर्चा के लिए यहां बैठक करेंगे और जम्मू कश्मीर के लिए भावी योजना बनाएंगे।
कश्मीर में अशांति समाप्त करने के लिए गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का दो दिवसीय दौरे का सोमवार को समापन हो गया। इस प्रयास में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। श्रीनगर में हुर्रियत नेताओं से मिलने पहुंचे कुछ सांसदों को बैरंग लौटाये जाने से नाखुश सिंह ने कहा था कि उनका रवैया लोकतंत्र, मानवता या यहां तक कि ‘कश्मीरियत’ के खिलाफ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीडीपी कश्मीर घाटी में बीते दो महीने से चल रही अस्थिरता के दौरान आम नागरिकों की मौतों और अन्य क्षतियों के कारण जनता में विश्वास खो रही है। उल्लेखनीय है कि बीते दो महीने में कश्मीर घाटी में हिंसक विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ टकराव में 74 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
दक्षिणी कश्मीर का इलाका सर्वाधिक प्रभावित रहा है, जो पीडीपी का गढ़ भी रहा है। कश्मीर विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्राध्यापक ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, 'यह बहुत ही कठिन निर्णय है। लेकिन और कोई विकल्प भी तो नहीं है। अस्थिरता के इस माहौल के कारण पीडीपी की सहयोगी बीजेपी का जम्मू और लद्दाख में जनाधार मजबूत हुआ है।'
उन्होंने कहा, 'बीजेपी के पास कश्मीर में खोने के लिए कुछ नहीं है। अस्थिरता के मौजूदा दौर में कश्मीर घाटी के संवेदनशील इलाके (नरमपंथी अलगाववादी) सिकुड़े हैं, जहां स्थानीय मुख्यधारा की पार्टियां आसानी से जीतती आई हैं। राजनीतिक सीमारेखा खींच दी गई है, या तो आप भारत के समर्थक हैं या आजादी के। इन संवेदनशील इलाकों में अब तक सबसे सशक्त रही पीडीपी को निश्चित तौर पर अब सर्वाधिक नुकसान होने वाला है।'
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