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राजीव गांधी हत्याकांड मामलाः सुप्रीम कोर्ट का आदेश- 3 महीने में सातों आरोपियों का फैसला करे केंद्र सरकार

राजीव गांधी हत्याकांड मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 7 आरोपियों की सजा पर जबाव मांगा है।

राजीव गांधी हत्याकांड मामलाः सुप्रीम कोर्ट का आदेश- 3 महीने में सातों आरोपियों का फैसला करे केंद्र सरकार

राजीव गांधी हत्याकांड मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 7 आरोपियों की सजा पर जबाव मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को तीन महीने का समय दिया है और कहा है कि जल्द से जल्द इस मामले में अपना रूख स्पष्ट करें।

मामले के सातों अभियुक्तों को माफी देने पर तमिलनाडु सरकार पहले ही अपनी राय व्यक्त कर चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार के ढुल-मुल रवैये के चलते मामला अटका पड़ा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 90 दिन का समय दिया है और फैसला कर लेने को कहा है।

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राजीव गांधी हत्याकांड मामले में तमिलनाडु सरकार ने मई 2016 में केंद्र सरकार को 7 आरोपियों को माफी देने के संबंध में पत्र लिखा था। बाद में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से भी इसी संबंध में याचिका डाली थी।

फांसी के पक्ष में नहीं यूपीए

याचिका के अनुसार कांग्रेस नीत यूपीए सरकार इन अभियुक्तों के फांसी के पक्ष में नहीं थी। याचिका में एनडीए समेत दूसरे विपक्षी दलों की राय का भी हवाला दिया था। इसमें कहा गया था विपक्ष ने भी आरोपियों की सजा के पक्ष में कुछ नहीं कहा था।

ये सात लोग हैं आरोपी

लेकिन केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद से ‌इस सिफारिश को लटकाए हुए है। इसी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (23 जनवरी) को केंद्र सरकार से सभी सात दोषियों संथन, मुरूगन, पेरारीवलन, नलिनी श्रीहरन, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और जयकुमार पर रुख स्पष्ट करने को कहा। ये सभी अभियुक्त जेल में हैं और उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

राजीव गांधी की हत्या

अलगाववादी तमिल संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) प्रमुख प्रभाकरण के इशारे पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को मानव बम के द्वारा हत्या की गई थी। यह हत्या एक रैली के दौरान हुई थी।

24 मई 1991 को सीबीआई की स्पेशल टीम ने इस पर मामला दर्ज किया था। वहीं मिले एक कैमरे की सहायता से धनु, लता, सुभा, नलिनी और सिवरासन तीन शख्स की पहचान हुई थी। बाद में सिवरासन को मामले का मास्टर माइंड और मुरूगन को उसका दाहिना हा‌थ बताया गया।

1999 में निचली अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

जांच पड़ताल के वक्त करीब 100 लिट्टे समर्थकों के साइनाइड खाकर जान देने की खबरें भी मामले में आम रहीं। इसके बावजूद सीबीआई ने 26 लोगों मुकदमा चलाया। इनमें सात लोगों को साल 1999 में निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। लेकिन बाद में राज्य सरकार इन्हें माफ करने को लेकर आगे आई।

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