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Rajasthan Diwas 2018: जिसने रियासतो के गठन का किया था विरोध, उसी ने आखिर में बताया था राजस्थान का नाम

69 साल पहले 30 मार्च 1949 यानी आज के दिन राजस्थान दिवस के रूप में मनाया गया था। इस दिन जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बिकानेर की रियासतो को मिलाकर राजस्थान का गठंन किया गया था।

Rajasthan Diwas 2018: जिसने रियासतो के गठन का किया था विरोध, उसी ने आखिर में बताया था राजस्थान का नाम
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69 साल पहले 30 मार्च 1949 यानी आज के दिन राजस्थान दिवस के रूप में मनाया गया था। इस दिन जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बिकानेर की रियासतो को मिलाकर राजस्थान का गठंन किया गया था।

इस एकीकरण में सरदार वल्लभ भाई पटेल की महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इस एकीकरण की शुरुआत 1 नवंबर 1956 में हो गई थी। राजस्थान को राजाओं का स्थान कहा जाता है और जब इन राज्यों को मिलाया गया तब यहां सभी राजपूत, गुर्जर, मौर्य और जाट राजाओं का राज किया करते थे।

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राजस्थान दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार पूरे राज्य में तरह तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया है। तीन दिवसीय कार्यक्रम में राजस्थान की कला का प्रदर्शन किया जाता है और इसमें बॉलीवुड के कई कलाकार भी हिस्सा लेते है, जिस वजह से इस कार्यक्रम में चार चांद लग जाते है।

मुख्य कार्यक्रम राजस्थान की राजधानी जयपुर के पोलो ग्राउंड में आयोजित किया है।

बता दें कि राजस्थान को बनाने की प्रक्रिया में सात चरणों में पूरी हुई थी। जब रियासतों को मिलाने की बात उठी थी तब वहां के राजाओं ने इन रियासतों के मिलन पर कड़ा विरोध जताया था। तब देश के उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने रियासतों को मिलाने का जिम्मा उठाया था।

उदयपुर के राजा महाराणा भूपल सिंह को रियासतों को मिलाने की बात पर इतना गुस्सा आ गया था कि वह दिल्ली भी नहीं गए और उन्होंने कहा था कि अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल को मिलना है तो उन्हें यहां आना होगा।

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बाद में सरदार वल्लभ भाई पटेल उदयपुर के राजा महाराणा भूपल सिंह से मिलने कई कांग्रेसी नेताओं के साथ गए थे। इस बैठक में मोहन लाल सुखाड़िया, माणिक्य लाल वर्मा, गोकुल लाल और अन्य कांग्रेसी नेता शामिल थे।

उस समय अंग्रेजों ने इस राज्य को राजपुताना नाम दिया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों के राजाओं को भी भरोसा दिया कि वह आंग्रेजों का दिया नाम राजपुताना से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। आखिर में महाराणा भूपल सिंह ने राजस्थान नाम का प्रस्ताव दिया था।

बता दें कि महाराणा भूपल सिंह ने इस नाम के पीछे की वजह यह बताई थी कि राजपुताना छोटी रियासत को दिखाता है और साथ ही इस नाम में राजपूतो को दिखाता है। बल्कि इस राज्य में करीब 36 जातियों और धर्म के लोग रहते है इसलिए इसका नाम राजस्थान रखा जाना चाहिए।

जब सात चरणों में रियासतों को मिलाकर राजस्थान बनाया गया, तब जयपुर को इसकी राजधानी बना दिया गया था और इस दिन को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया गया था।

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