Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

विवादित बिल को लेकर चौतरफा आलोचनाओं के बाद बैकफुट पर आई वसुंधरा सरकार

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस विवादित बिल को अब सिलेक्ट कमिटी के हवाले कर दिया है।

विवादित बिल को लेकर चौतरफा आलोचनाओं के बाद बैकफुट पर आई वसुंधरा सरकार

भ्रष्ट सरकारी बाबूओं को बचाने वाले विवादित बिल को लेकर चौतरफा आलोचनाओं के बाद राजस्थान की वसुंधरा सरकार बैकफुट पर आ गई है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस विवादित बिल को अब सिलेक्ट कमिटी के हवाले कर दिया है।

यह भी पढ़ें: जानिए, हुर्रियत नेताओं, कश्मीरी नौजवानों पर क्या है दिनेश्वर शर्मा की सोच?

सीएम वसुंधरा राजे ने कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों से बातचीत के बाद विवादित बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने का फैसला लिया। विपक्ष के हमलों के बाद राजे सरकार को यह किरकिरी सहनी पड़ी है। सिलेक्ट कमिटी के पास विवादित बिल जाने से यह मुद्दा ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई है।

यह भी पढ़ें: दिल्ली की कमला मार्केट में लगी जबर्दस्त आग, 100 दुकानें हुईं खाक

बता दें कि विवादित बिल को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में ही दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इसके अलावा भाजपा के दो विधायकों ने भी विवादित बिल की आलोचना की थी। इसके बाद वसुंधरा सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

बिल को लेकर विवाद क्यों?

बता दें कि इस बिल के तहत राजस्थान में अब पूर्व और मौजूदा जजों, अधिकारियों, सरकारी बाबुओं के खिलाफ पुलिस और कोर्ट में शिकायत करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। ऐसे केसे में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की इजाजत लेना जरूरी होगा।

यह भी पढ़ें: बेटी अनीता बोस बोलीं, नेताजी की अस्थियां वापस लाने में किसी सरकार को फायदा नहीं दिखता

इतना ही नहीं, राजस्थान सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर भारतीय दंड संहिता में संशोधन कर दिया है। इसके तहत राज्य सरकार की इजाजत के बिना आरोपित अधिकारी की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी। अगर किसी ने इसका उल्लंघन किया तो 2 साल की सजा के साथ जुर्माने भी लगाया जाएगा।

Next Story
Top