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आम बजट के साथ ही पेश होगा रेल बजट, 92 साल पुरानी परंपरा खत्म

रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दे दी है।

आम बजट के साथ ही पेश होगा रेल बजट, 92 साल पुरानी परंपरा खत्म
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 92 साल से चली आ रही रेल बजट की परंपरा को खत्म कर दिया है। अब आम बजट में रेल बजट को मिला दिया जाएगा। रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दे दी है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। रेल मंत्री सुरेश प्रभु और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल साउथ ब्लॉक में होने वाली इस बैठक में मौजूद थे।
रेल मंत्री या मंत्रालय के अधिकारों एवं स्वायत्तता को कोई फर्क नहीं
सूत्रों के अनुसार इस फैसले से रेल मंत्री या मंत्रालय के अधिकारों एवं स्वायत्तता को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। रेलवे की नीतियों एवं योजनाओं पर मंत्रालय का नियंत्रण यथावत रहेगा। अगले वर्ष से आम बजट में ही रेलवे का विवरण शामिल किया जायेगा और बजट दस्तावेज में अनुलग्नक के रूप में रेल बजट संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जायेगा। बजट संसद में पेश किए जाने के बाद रेलमंत्री संवाददाता सम्मेलन में अगले वित्त वर्ष के लिए रेलवे के बजट प्रस्तावों की जानकारी देंगे।
आगामी साल में आम बजट के साथ रेल बजट पेश
एनबीटी की खबर के मुताबिक, अरुण जेटली ने इस बाबत प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आने वाले साल से आम बजट में ही रेल बजट पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विचार विमर्श के बाद इसकी तारीख पर फैसला लिया जाएगा।
इसके साथ ही जेटली ने कहा कि विकास के मसले पर रेलवे की भूमिका अलग नहीं है। बजट की प्रक्रिया 31 मार्च से पहले खत्म करने का विचार है। सरकार सैद्धांतिक तौर पर बजट की तारीख पहली करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने भी कहा है कि रेल बजट का आकार अब छोटा हो चुका है और आम बजट बड़ा होता गया है।
बजट प्रक्रिया को एक अप्रैल को पूरी करने का इरादा
सरकार का इरादा समूची बजट प्रक्रिया को एक अप्रैल को नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पूरी करने का है, ताकि बजट प्रस्तावों को नया वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही अमल में लाया जा सके। यही वजह है कि बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को समय से पहले शुरू किया जा रहा है और फरवरी अंत के बजाय फरवरी के पहले दिन बजट पेश करने का फैसला किया जा सकता है।
1924 से अब तक आम बजट से अलग रेल बजट पेश होता रहा
बता दें कि 1924 से अब तक आम बजट से अलग रेल बजट पेश होता रहा है। आगामी वित्त वर्ष के लिए साल 2017 में अब सिर्फ और सिर्फ आम बजट ही संसद में पेश किया जाएगा। रेल मंत्रालय का वित्तीय लेखा-जोखा भी आम बजट का उसी तरह से हिस्सा होगा, जैसे दूसरे मंत्रालय के लिए होता है। वैसे तो आम बजट में रेल बजट के मर्जर के सैद्धांतिक सहमति हो गई है। इसके लिए नीति आयोग के प्रस्ताव पर रेलमंत्री ने अपनी सहमति पहले ही जता दी है।
रेल बजट को आम बजट में समाहित करने का अनुरोध
उल्लेखनीय है कि रेल मंत्री ने संसद के मानसून सत्र में बताया था कि उन्होंने वित्त मंत्री को पत्र लिख कर रेल बजट को आम बजट में समाहित करने का अनुरोध किया है। रेल मंत्रालय गाड़ियों के यात्री किरायों एवं मालभाड़ों के निर्धारण के लिये एक स्वायत्त प्राधिकरण की स्थापना की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुका है। जानकारों का कहना है कि इस फैसले के बाद आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए रेलवे को एकीकृत परिवहन मंत्रालय में विलय करना आसान हो जाएगा।
विनियोग विधेयक और लेखानुदान पेश करने की आवश्यकता नहीं
रेल बजट को आम बजट में मिला दिए जाने और बजट पेश करने का तिथि पहले करना के बाद अलग से विनियोग विधेयक और लेखानुदान पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। मौजूदा प्रक्रिया में अप्रैल से जून तीन माह के लिए पहले लेखानुदान पारित कराया जाता है। जहां तक योजना और गैर-योजना बजट वर्गीकरण को समाप्त करने की बात है, वित्त मंत्री अरुण जेटली इस साल के बजट में ही इसकी घोषणा कर चुके हैं।
सूत्रों का कहना है कि बजट को एक महीना पहले पेश करने और पूरी बजट प्रक्रिया नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले पूरी होने से मंत्रालयों और विभागों को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन को वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही बेहतर ढंग से करने में मदद मिलेगी। संभव है कि विभिन्न पक्षों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श को 25 दिसंबर से पहले पूरा कर लिया जाए।
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