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विश्लेषण / राफेल डील पर कांग्रेस के दुष्प्रचार की आखिर कलई खुली

देश की रक्षा से जुड़े मसले पर कांग्रेस की राजनीति शर्मनाक स्तर पर पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार फ्रांस के साथ भारत की राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं और इस दरम्यान वे लगातार झूठे आरोप लगा रहे हैं। राफेल डील में पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार अपने स्तर पर सफाई दे चुकी है।

विश्लेषण / राफेल डील पर कांग्रेस के दुष्प्रचार की आखिर कलई खुली

देश की रक्षा से जुड़े मसले पर कांग्रेस की राजनीति शर्मनाक स्तर पर पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार फ्रांस के साथ भारत की राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं और इस दरम्यान वे लगातार झूठे आरोप लगा रहे हैं। राफेल डील में पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार अपने स्तर पर सफाई दे चुकी है।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण स्थिति स्पष्ट कर चुकी हैं, वित्त मंत्री अरुण जेटली इस डील के तकनीकी पहलू को देश के सामने रख चुके हैं, फ्रांस की सरकार अपना पक्ष रख चुकी है, केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय में राफेल सौदे की पूरी प्रक्रिया की जानकारी सीलबंद लिफाफे में सौंपी है और अब राफेल निर्माता कंपनी दसॉ एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने दो टूक कहा कि भारत के साथ इस डील में कुछ भी नहीं छिपाया।

दसॉ के प्रमुख ने अपने देश फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान को झूठ करार देते हुए और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जॉइंट वेंचर (जेवी) के तहत ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के लिए हमने रिलायंस को खुद चुना, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।

फ्रांस सरकार के बाद अब दसॉ ने कहा कि रिलायंस को चुनने का भारत सरकार से कोई दबाव नहीं था। दसॉ के सीईओ ने कहा कि मैं झूठ नहीं बोलता, हमने कांग्रेस के साथ काम किया है, राहुल गांधी के आरोपों से दुखी हूं, इसमें निवेश का पैसा रिलायंस को नहीं जाएगा, बल्कि एक जॉइंट वेंचर को जाएगा। रिलायंस के अलावा 30 अन्य कंपनियों से भी करार किया है।

दसॉ प्रमुख ने कहा कि भारत को नौ फीसदी सस्ते में राफेल बेचे गए हैं। राहुल गांधी ने गत 2 नवंबर को दसॉ के सीईओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था और कहा था कि दसॉ ने अनिल अंबानी की कंपनी को 284 करोड़ रुपये दिए और अंबानी ने उसी पैसे से जमीन खरीदी। राहुल ने तंज कसा था कि दसॉ केवल मोदी को बचा रही है और जांच होगी, तो पीएम नहीं टिक पाएंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि मोदी सरकार ने यूपीए की अपेक्षा करीब तीन गुना महंगे में राफेल विमान खरीदे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर सरकारी कंपनी एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड) की अनदेखी कर अनिल अंबानी की नई कंपनी के साथ फ्रांसीसी कंपनी दसॉ को डील करने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया है।

अब दसॉ की सफाई से कांग्रेस व राहुल गांधी के झूठ देश के सामने आ गए हैं। दरअसल राहुल कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने के लिए राफेल डील को चुनावी मुद्दा बनाने पर तुले हुए हैं। वे राफेल के सच को समझने के लिए तैयार ही नहीं हैं। वे हर चुनावी भाषण में राफेल का राग अलाप रहे हैं और सरकार पर अनर्गल आरोप मढ़ रहे हैं।

कांग्रेस की मंशा लोकसभा चुनाव तक राफेल मुद्दे को सुलगा कर रखने की लग रही है। ऐसा इसलिए कि दसॉ की सफाई के बाद भी कांग्रेस इसे सरकार की सेटिंग कह कर खारिज करने की कोशिश कर रही है। भारत के सामने चीन व पाक के रूप में जिस तरह की रक्षा चुनौतियां हैं, उसमें रक्षा सौदे पर राजनीतिक रोटी सेंकना अच्छी परिपाटी नहीं है।

देश में हर रक्षा सौदे को शक की निगाह से देखने का ट्रेंड बन गया है, इस पर रोक लगनी चाहिए। कांग्रेस को राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देना चाहिए, न कि हर चीज के लिए स्यापा मचाना चाहिए। विदेशों से डील पर इस तरह की छींटाकशी होगी तो, भारतीय राजनीति की कैसी छवि बनेगी? कांग्रेस को इस पहलू पर गंभीरता से सोचना चाहिए।

कांग्रेस को अपनी गिरबां में भी झांकना चाहिए कि उनकी सरकार के दौरान रक्षा सौदे में कितनी पारदर्शिता बरती गई थी? मोदी सरकार ने तो देश की शीर्ष अदालत के सामने राफेल डील की समस्त प्रक्रिया रखने का साहस दिखाया है। राहुल के झूठ के सामने आने के बाद कांग्रेस को राफेल पर राजनीति बंद करनी चाहिए।

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