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नवाज ने ''बाजवा'' के नाम पर सालों पहले लगा दी थी मुहर

बाजवा ने हमेशा लोकतंत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की।

नवाज ने
इस्लामाबाद. कमर बाजवा पाकिस्तान के अगले आर्मी चीफ जनरल के पद को संभालेंगे। बाजवा का पाक सेना प्रमुख बनना दो साल पहले ही तय हो चुका था। साल 2014 में पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (पीटीआई) के देशव्यापी धरने के दौरान ही बाजवा को देश का अगला आर्मी चीफ बनाए जाने की भूमिका बननी शुरू हो गई थी। वजह थी बाजवा का लोकतंत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करना।
पाकिस्तानी अखबार 'दुनिया न्यूज' ने दावा किया है कि, 'दो साल पहले जब पीटीआई ने 2 महीने तक धरना प्रदर्शन जारी रखा था, तो इस्लामाबाद और उसके आसपास के इलाकों की कमान बाजवा के हाथों में थी। मगर उन्होंने किसी भी ऐसे कदम को उठाने से परहेज किया जो लोकतंत्र के हित में न हो। बाजवा को लोकतंत्र समर्थक माना जाता है। इसलिए नवाज ने तभी बाजवा को अगला आर्मी चीफ बनाने का फैसला ले लिया था।
दुनिया न्यूज के सीनियर पॉलिटिकल ऐनालिस्ट कामरान खान का कहना है 'इमरान खान की पार्टी के धरने के दौरान बाजवा ने उनके खिलाफ कोई कदम उठाने के बजाए इलाके में बड़ी संख्या में सैनिक भेजे ताकि रेड जोन सुरक्षित रहे। यह साफ संकेत था कि लोकतंत्र के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई से परहेज किया जाएगा। तभी जब प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पास चार नाम आए तो उन्होंने बाजवा के नाम पर मुहर लगा दी।'
एक अन्य रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सज्जाद गनी ने 'द न्यूज' को बताया कि 'नवाज शरीफ को बाजवा लोकतांत्रिक सरकार के साथ तालमेल बिठाने के लिहाज से सबसे बेहतर विकल्प लगे। बाजवा की छवि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली है।'
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