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पुणे हिंसा: अंग्रेजों की 200 साल पुरानी जीत का जश्न मना रहे थे दलित, सुलगा महाराष्ट्र- रूकी मुंबई की लाइफ लाइन

महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को लेकर जबर्दस्त आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों ने हार्बर लाइन पर उपनगरीय एवं स्थानीय ट्रेन सेवाएं बाधित कर दीं।

पुणे हिंसा: अंग्रेजों की 200 साल पुरानी जीत का जश्न मना रहे थे दलित, सुलगा महाराष्ट्र- रूकी मुंबई की लाइफ लाइन

महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को लेकर जबर्दस्त आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों ने हार्बर लाइन पर उपनगरीय एवं स्थानीय ट्रेन सेवाएं बाधित कर दीं।

प्रदर्शनकारियों में मुंबई के कई इलाकों में सड़कें अवरूद्ध कर दीं, दुकानें बंद करा दीं और एक टेलीविजन समाचार चैनल के पत्रकार पर हमला भी किया। मध्य रेलवे ने अपने हार्बर कॉरिडोर पर कुर्ला और वाशी के बीच उपनगरीय सेवाएं निलंबित कर दी। सीएसएमटी-कुर्ला एवं वाशी-पनवेल खंड के बीच विशेष सेवाएं चला रही है।

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मध्य रेलवे के सभी स्टेशनों पर इस सेवा की घोषणा की जा रही है। एक अधिकारी ने बताया कि पुणे में सोमवार को युद्ध की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में एक व्यक्ति की मौत से आक्रोशित लोगों के समूहों ने सुबह शहर के पूर्वी उपनगरीय इलाकों चेम्बूर, विखरोली, मानखुर्द और गोवंडी में विरोध प्रदर्शन किया और दुकानों एवं प्रतिष्ठानों को बंद करने पर मजबूर कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अमर महल इलाके में विरोध प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने एक टीवी समाचार चैनल के एक पत्रकार पर हमला किया। हालांकि वह बच गया।

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अधिकारी ने कहा कि ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर प्रियदर्शन, कुर्ला, सिद्धार्थ कॉलोनी और अमर महल इलाकों में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुट गयी और उन्होंने जुलूस निकाला एवं सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने हार्बर लाइन के गोवंडी एवं चेम्बूर रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय ट्रेन सेवाएं रोक दीं।

भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कल कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसके चलते हुई हिंसा की घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गयी। युद्ध में ईस्ट कंपनी कंपनी के बलों ने पेशवा की सेना को हराया था।

दलित नेता ब्रितानियों की जीत का जश्न मनाते हैं क्योंकि माना जाता है कि उस समय अछूत समझे जाने वाले महार समुदाय के लोग ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में सैनिक थे।

इसलिए जश्न

महाराष्ट्र के पुणे में यह सारा विवाद अंग्रेजों और पेशवाओं के बीच हुए युद्ध के 200 साल पूरे होने को लेकर हुआ है। जिसमें एक जनवरी 1818 में अंग्रेजों ने दलितों की सहायता से पेशवा द्वितीय को शिकस्त दे दी थी। पुणे के कोरेगांव के जय स्तंभ पर हर साल यह उत्सव मनाया जाता है।

विवाद की वजह

पुणे के भीम कोरेगांव में सोमवार को आयोजन के दौरान नजदीक के कई गांवों के मराठाओं ने इसका विरोध किया, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। देखते ही देखते यह विवाद कोरेगांव से निकलकर मुंबई और अहमदनगर तक पहुंच गया। जहां दलित और मराठा संगठन आमने-सामने आ गए हैं। इसके चलते एक व्यक्ति की भी मौत हो गई।

कैसे शुरू हुई हिंसा

हिंसा तब शुरू हुई जब एक स्थानीय समूह और भीड़ के कुछ सदस्यों के बीच स्मारक की ओर जाने के दौरान किसी मुद्दे पर बहस हुई। भीमा कोरेगांव की सुरक्षा के लिए तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया, बहस के बाद पथराव शुरू हुआ। हिंसा के दौरान कुछ वाहनों और पास में स्थित एक मकान को क्षति पहुंचाई गई।

न्यायिक जांच के आदेश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, सरकार को बदनाम करने की साजिश है। सरकार ने इसकी न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने मृतक के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है। सरकार को बदनाम करने की साजिश है। सीएम ने यह अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान ना दें।

राहुल का भाजपा पर वार

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हिंसा को लेकर आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारत के लिए आरएसएस और भाजपा का फासीवादी दृष्टिकोण ही यही है कि दलितों को भारतीय समाज में निम्न स्तर पर ही बने रहना चाहिए।

राहुल गांधी ने उना की घटना और रोहित वेमुला का भी जिक्र किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, उना, रोहित वेमुला और अब भीमा-कोरेगांव प्रतिरोध के सशक्त प्रतीक हैं।

बंद की अपील

महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के पौत्र और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद की अपील की है। वहीं मुंबई पुलिस के पीआरओ का कहना है कि शहर में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

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