logo

पुलवामा आतंकी हमला : आतंक की जननी पाक सेना

हर बड़े हमले के बाद इसी तरह का आक्रोश देखने को मिलता है। हर बार जैश-ए-मोहम्मद या पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों का नाम सामने आता है। आवाजें उठती हैं कि मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसों का इलाज किया जाए। लोग सड़कों पर उतरते हैं।

पुलवामा आतंकी हमला : आतंक की जननी पाक सेना

हर बड़े हमले के बाद इसी तरह का आक्रोश देखने को मिलता है। हर बार जैश-ए-मोहम्मद या पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों का नाम सामने आता है। आवाजें उठती हैं कि मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसों का इलाज किया जाए। लोग सड़कों पर उतरते हैं। टीवी चैनलों और समाचार-पत्रों में भी कार्रवाई की आवाजें उठती हैं।

सरकार पर दबाव पड़ता है। वह कार्रवाई भी करती है परंतु सीमा पार से निर्यात होने वाले आतंकवाद में कोई कमी दर्ज नहीं होती। इस बार भी वैसा ही आक्रोश है, जैसा मुंबई, संसद, उड़ी और पठानकोट एयरबेस पर हुए अटैक के बाद पूरे देश में देखा गया था।

सरकार भी चालीस जवानों की शहादत का ठीक-ठीक जवाब देने की चेतावनी दे चुकी है। पक्ष-विपक्ष अभी तक एक स्वर में बोलते दिखाई दे रहे हैं। अगले कुछ दिनों में कोई बड़ी कार्रवाई अपेक्षित भी है परंतु इसके बाद फिर कोई वारदात नहीं होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

मुंबई, भारतीय संसद, पठानकोट एयरबेस, उड़ी और पुलवामा के सभी हमलों के तार सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों से जुड़े हुए मिले हैं। भारत ने हर बार पुख्ता सबूत भी सौंपे हैं परंतु पाकिस्तान की अदालतों ने कभी किसी दोषी को सजा नहीं सुनाई।

अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर तमाम देशों के दबाव के बावजूद पाकिस्तान आतंकी संगठनों को मदद देना बंद नहीं कर रहा है। अमेरिका तो उसे दी जानी वाली मदद भी बंद कर चुका है। आर्थिक रूप से कंगाल हो चुका हमारा पड़ोसी मुल्क क्यों आग से खेल रहा है, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा। जब भी भारत अथवा अफगानिस्तान में आतंकी हमले होते हैं, तब उसकी प्रतिक्रिया हमेशा डिनायल वाली होती है।

पूरी दुनिया जान और समझ चुकी है कि आतंक की खेती वही कर रहा है। पीओके से लेकर पंजाब के कुछ हिस्से और पेशावर के बहुत से इलाके आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाह बने हुए हैं।

यह हास्यास्पद नहीं तो क्या है कि भारत में होने वाली हर बड़ी वारदात के बाद पाकिस्तान अस्वीकार की मुद्रा में ही रहता है जबकि अजमल कसाब से लेकर कई पाकिस्तानी आतंकवादी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में आ चुके हैं। मुंबई हमले के दोषी कसाब को भारतीय अदालतें सजा सुना चुकी हैं। उसे फांसी दी जा चुकी है परंतु पाकिस्तान में छिपे मुंबई के दोषियों के खिलाफ अब तक वहां की अदालतों में ठीक से ट्रायल तक शुरू नहीं हुए हैं।

प्रश्न यही उठता है कि वहां की सरकार और न्याय प्रक्रिया से जुड़ी दूसरी संस्थाएं भारत विरोधी जमातों के खिलाफ सजा को लेकर इस कदर उदासीन क्यों हैं। इन तमाम प्रश्नों का एक ही उत्तर है कि पाकिस्तान की सेना वहां की हर संस्था पर हावी है, जिसके चलते भारत विरोधी आतंकी संगठनों पर न वहां की कथित चुनी हुई सरकारें नकेल कसने की हिम्मत जुटा पाती हैं और न अदालतें दोषियों को सजा सुनाती हैं।

पाकिस्तानी सेना कितनी कायर है, यह बताने की आवश्यकता नहीं है। 1948, 1965, 1971 और 1999 के युद्ध में वह भारत के हाथों बुरी तरह परास्त हो चुकी है। उसे इसका अहसास है कि आमने-सामने की जंग में वह कभी जीत ही नहीं सकती है। यही कारण है कि पहले उसने पंजाब में आतंकवाद को हवा दी और उसके बाद 1989 से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को खाद पानी देने का काम शुरू किया था।

जम्मू कश्मीर सरकारों की गलत नीतियों और भ्रष्टाचार के अलावा केन्द्र की कई सरकारों के अवांछनीय हस्तक्षेपों ने इस समस्या को और भी पेचीदा बना दिया। सीमा पार से होने वाली वारदातों के बाद भी सुरक्षाबलों और सेना को कड़ी कार्रवाई से रोका जाता रहा। नतीजतन आज यह समस्या नासूर बनकर हमारे सामने मुंह बाए खड़ी है। हजारों जवान और नागरिक अब तक इस विभिषिका की भेंट चढ़ चुके हैं।

हर बड़ी वारदात से देश का बहुत बड़ा नुकसान होता है। चाहे मुंबई हो, भारतीय संसद पर अटैक, उड़ी की घटना रही हो या पठानकोट एयरबेस पर हमला। लगभग हर बार भारतीय सेना और सुरक्षाबलों को कड़ी कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ा है क्योंकि जनाक्रोश को शांत करने के लिए इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता सरकार को दिखाई नहीं देता है।

उड़ी के बाद कई मोर्चों पर एक साथ काम शुरू किया गया था। सर्जिकल स्ट्राइक से तो पाकिस्तान को यह संदेश दिया ही गया कि हम सीमा पार करके उसके घर में घुसकर मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक मुहिम छेड़कर उन सभी देशों को पाकिस्तान की करतूतों से अवगत भी कराया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का बचाव करते थे।

उसी मुहिम का नतीजा रहा कि वह न केवल दुनिया में अलग-थलग पड़ गया बल्कि आर्थिक रूप से दिवालिया होने के कगार पर पहंच गया। बहुत लंबे समय से उसकी मदद करते आ रहे अमेरिका तक ने उसका साथ छोड़ दिया।

लेकिन सवाल उठता है कि इतना कुछ होने के बावजूद पाकिस्तान सुधर क्यों नहीं रहा। वहां स्थित आतंकियों के शिविर बंद क्यों नहीं हो रहे। हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी से लेकर तालिबान का हक्कानी गुट खुले आम अपनी गतिविधियों को अंजाम कैसे दे रहे हैं जबकि इनमें से अधिकांश संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल हैं।

इसका एक ही उत्तर है कि पाकिस्तान की वह कायर सेना इन सबको संरक्षण दिए हुए है जो सीधी लड़ाई में आज तक एक भी युद्ध नहीं जीत सकी है। वह कश्मीरी युवकों पर कम पैसे खर्च करके उनका ब्रेश वाश कर रही है और आतंकी सरगनाओं की मदद से उन्हें सीमा पार कराकर भारत और अफगानिस्तान में खून खराबे के लिए भेज रही है।

इस छाया युद्ध से वह अपने सैनिकों को भी बचाए हुए है और अपने मकसद में बहुत हद तक कामयाब भी हो रही है। वह वहां के पूरे निजाम पर इस हद तक हावी है कि चुनी हुई सरकारों ने जब-जब भी शांति और वार्ता के लिए कदम उठाने की कोशिश की है, तब-तब उसने या तो उनके तख्ते पलट दिए हैं या मुकदमों में फंसाकर प्रधानमंत्रियों को सींखचों के पीछे पहुंचा दिया है। यही नहीं, भारत की पीठ में भी आतंकी संगठनों के जरिए छुरा घोंपने की साजिशें की हैं।

पुलवामा की वारदात में भारत ने चालीस जवान खोए हैं। इसलिए पूरे देश में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यह गैर वाजिब भी नहीं है। सरकार पर बड़ी और कड़ी कार्रवाई का दबाव है। अगले कुछ दिनों में कोई एक्शन देखने को मिल भी सकता है परंतु यह वारदात बहुत गलत समय पर हुई है। भारत चाहकर भी पाकिस्तान पर कोई बड़ी और निर्णायक कार्रवाई अभी नहीं कर पाएगा, क्योंकि अगले बीस दिन में लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

ऐसे में छोटा-मोटा युद्ध भी नहीं छोड़ा जा सकता लेकिन मई में नई सरकार के गठन के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ठोस कार्रवाई देखने को मिल सकती है। कार्रवाई जिस भी स्तर पर हो, सरकार को यह ध्यान में रखना होगा कि आतंकवाद की जननी और तमाम समस्याओं की जड़ पाकिस्तानी सेना है और इस बार कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए कि पाकिस्तानी सेना के होश ठिकाने लग जाएं। वह भारत के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश रचने से पहले सौ बार सोचे।

Loading...

Latest

View All

वायरल

View All

गैलरी

View All
Share it
Top