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पुलवामा आतंकी हमला : चीन से उम्मीद नहीं

कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में जवानों पर हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मौहम्मद ने ली है। पाकिस्तान की सरजमीन से संचालित जैश-ए-मोहम्मद एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गिरोह है।

पुलवामा आतंकी हमला : चीन से उम्मीद नहीं
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कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में जवानों पर हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मौहम्मद ने ली है। पाकिस्तान की सरजमीन से संचालित जैश-ए-मोहम्मद एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गिरोह है। मौलाना मसूद अजहर इसका सर्वोच्च सरगना है। संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के लिए भारत ने पुरजोर कोशिशें की, किंतु चीन ने वीटो करके उसे नाकाम कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर चीन का पाखंडपूर्ण कारनामा, फिर से दुनिया के समक्ष उजागर हो गया। चीन ने पुलवामा में हमले की निंदा तो अवश्य की है, किंतु मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की भारत की पहल की हिमायत करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग वुआंग ने अपने बयान मकहा कि चीन को पुलवामा में आत्मघाती आतंकवादी हमले की जानकारी है।

चीन किसी भी किस्म के आतंकवाद कड़ी निंदा करता है। अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने पर गेंग वुआंग ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति का हवाला दिया और कहा कि आतंकवादी गिरोहों और उनके सरगनाओं को सूचीबद्ध करने के नियम स्पष्ट हैं और मसूद अजहर को इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता।

चीन का शिनझियांग प्रांत भारत के कश्मीर की तरह से ही जेहादी आतंकवाद के निशाने पर रहा है। उइगर जेहादियों दखुद को चीन से पृथक करने के लिए उत्पात मचाया हुआ है। चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत द्वारा उइगर जेहादियों का अत्यंत निर्ममता के साथ सफाया किया गया है। एक लाख जेहादी चीन के जेलों में हैं। एक तरफ चीन ने जेहादियों के प्रति सख्त रवैया अख्त्यार किया गया और दूसरी तरफ मसूद अजहर की पैरवी कर रहा है।

पाक को मुख्यालय बनाकर अंतरराष्ट्रीय जेहादी आतंकवाद चलाने वाले गिरोहों के प्रति चीन का हिमायती रवैया आखिर क्यों है। चीन इन जेहादी गिरोहों की अंधी हिमायत इसलिए करता है, क्योंकि चीन चाहता है कि इस हिमायत के बदले में पाक सरजमीन पर विद्यमान ये जेहादी गिरोह चीन के सक्रिय उइगर जेहादियों को अपना समर्थन प्रदान नहीं करें। चीन द्वारा पाकिस्तान में बहुत बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया जा रहा और लाखों की तादाद में चीन के इंजीनियर और मजदूर पाकिस्तान में कार्यरत हैं।

अतः पाकिस्तान स्थित जेहादी आतंकवादी गिरोह पाक में कार्यरत चीनियों को और चीन के प्रोजक्टों को अपना निशाना कदापि न बनाएं। अपने राष्ट्रीय हितों को केंद्रबिंदु में रखकर ही चीन सोची विचारी रणनीति के तहत मसूद अजहर सरीखे दहशतगर्द की हिमायत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो का इस्तेमाल कर रहा है। चीन का अंध राष्ट्रवाद की रणनीति पर चलते हुए अंतराष्ट्रीय आतंकवाद से कोई नैतिक सरोकार नहीं है।

पाक हुकूमत कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय दुर्दान्त दहशतगर्द गिरोहों का परिपोषण और समर्थन करती रही है। डोनॉल्ड ट्रंप ने अमेरिका से पाकिस्तान की आर्थिक और सैन्य सहायता खत्म की गई है। इससे पाकिस्तान में जो शून्य पैदा किया गया है, उसको भरने की पुरजोर कोशिश चीन द्वारा की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विरुद्ध भारत को अपनी लड़ाई खुद ही अपने बलबूते पर लड़नी होगी। इस दीर्घकालीन युद्ध में जेहादी आतंकवाद के हाथों स्वयं जख्मी हुए चीन से भारत को कोई समर्थन हासिल हो पाएगा, ऐसी कोई उम्मीद भारत को छोड़ देनी चाहिए।

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