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पुलवामा आतंकी हमला: देश में दु:ख और आक्रोश

पूरे देश में इस समय दुख और आक्रोश का माहौल है। जवानों को दी जा रही श्रद्धांजलि एवं हो रहे प्रदर्शन इसके प्रमाण हैं। यह स्वाभाविक भी है। जम्मू कश्मीर में पिछले तीन दशक में सुरक्षा बलों पर ऐसा आतंकवादी हमला कभी नहीं हुआ।

पुलवामा आतंकी हमला: देश में दु:ख और आक्रोश

पूरे देश में इस समय दुख और आक्रोश का माहौल है। जवानों को दी जा रही श्रद्धांजलि एवं हो रहे प्रदर्शन इसके प्रमाण हैं। यह स्वाभाविक भी है। जम्मू कश्मीर में पिछले तीन दशक में सुरक्षा बलों पर ऐसा आतंकवादी हमला कभी नहीं हुआ।

जरा सोचिए, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 से ज्यादा जवानों के परखचे उड़ जाएं, जिस बस में वे चले रहे हैं वो ध्वस्त हो जाए तो वह कितना बड़ा हमला रहा होगा। इसमें दो राय नहीं कि हमला सुनियोजित था। हाईवे पर विस्फोटकों से लदी गाड़ी लेकर प्रतीक्षा करने का अर्थ है कि उन्होंने पहले से इसकी तैयारी कर रखी थी।

देश की सामूहिक सोच बिल्कुल स्पष्ट है कि इस तरह अपने जवानों के बलिदान को हम चुपचाप सहन नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री ने देश को बता दिया है कि सेना को कार्रवाई की पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई है। वह कार्रवाई कब, कहां और कैसे करेंगे यह सेना तय करेगी। इसका मतलब बहुत गंभीर है। सेना को कार्रवाई का आदेश राजनीतिक नेतृत्व से मिलता है।

प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मतलब यह है कि सेना को हरि झंडी दे दी गई है। भारत का पहला लक्ष्य तो यही है कि सीमा पार से आतंकवाद का प्रायोजन बंद हो। भारत के साथ लगभग पूरी दुनिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति भवन की तरफ से पाकिस्तान को नाम लेकर चेतावनी दी गई है। पाकिस्तान द्वारा हमले में किसी तरह के हाथ न होने के वक्तव्य से अमेरिका बिल्कुल सहमत नहीं है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलना बेहद जरूरी है। चीन ने भी आतंकवादी हमलों की निंदा की है। यह वही चीन है जो जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का तीन प्रयास विफल कर चुका है।

इसका उल्लेख यहां इसलिए जरुरी है क्योंकि इस हमले की जिम्मेवारी जैश ने ही ली है। शुरुआती कदम के तौर पर भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने पाकिस्तान उच्चायुक्त सोहेल महमूद को बुलाकर एक कड़ा आपत्ति पत्र जारी किया है। इसका पाकिस्तान पर कोई असर शायद ही होगा। पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी सबसे ज्यादा तरजीही वाला देश का दर्जा वापस ले लिया गया है।

इस तरह एक बड़ा संदेश तो भारत की ओर से दिया ही गया है। प्रधानमंत्री ने विश्वशक्ति को साथ आने का आह्वान किया है। साफ है कि प्रधानमंत्री अपने स्तर पर पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ विश्व समुदाय से एक साथ आतंकवाद पर टूट पड़ने की अपील कर रहे हैं। यह अपील उन्होंने पिछले चार सालों में हर वैश्विक मंच पर किया है।

इस हमले के कई पहलू और भी है। 300 किलो विस्फोटक गाड़ी में लेकर आतंकवादी वहां तक पहुंचता है तो जाहिर है उसको सहयोग करने वाले लोग होंगे। दूसरे, वह आतंकवादी इतने विस्फोटक के साथ वहां पहुंच, घंटो प्रतीक्षा करता रहा और सुरक्षा बलों की नजर से बचा रहा तो कैसे? तीसरे, आतंकवादी तक सीआरपीएफ जवानों के गुजरने की जानकारी कब और कैसे मिली?

कोई या कुछ गद्दार तो हैं। जिस जगह हमला हुआ वहां 2017 में जैश के आतंकवादियों ने ही हमला किया था। वह स्थान हमले की दृष्टि संवेदनशील था। जो कार्रवाई आतंकवादियों और पाकिस्तान के खिलाफ होना चाहिए वह तो हो, लेकिन इस पर भी विचार करिए कि उन जगहों पर काफिले की सुरक्षा के लिए कोई विशेष प्रबंधन किया गया था या नहीं?

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