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Pulwama Attack Story : पुलवामा आतंकी हमले की कहानी...

Pulwama Attack Story : पुलवामा आत्मघाती हमले में चालीस के करीब सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने पर पूरे देश में आक्रोश है। वैसी ही सख्त कार्रवाई की मांग सरकार से की जा रही है, जैसी ढाई साल पहले उड़ी हमले के बाद की गई थी। उसमें भारतीय सेना ने सरहद पार पीओके में जाकर आतंकियों के कई लांचिंग पैड ध्वस्त कर दिए थे और तीन दर्जन से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया था।

Pulwama Attack Story : पुलवामा आतंकी हमले की कहानी...

Pulwama Attack Story : पुलवामा आत्मघाती हमले में चालीस के करीब सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने पर पूरे देश में आक्रोश है। वैसी ही सख्त कार्रवाई की मांग सरकार से की जा रही है, जैसी ढाई साल पहले उड़ी हमले के बाद की गई थी। उसमें भारतीय सेना ने सरहद पार पीओके में जाकर आतंकियों के कई लांचिंग पैड ध्वस्त कर दिए थे और तीन दर्जन से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया था।

केन्द्र सरकार लोगों के क्रोध से वाकिफ है। पुलवामा हमले के कुछ ही घंटों के भीतर सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए हैं। इनमें पाकिस्तान को 1996 में दिया गया एमएफएन दर्जा वापस लेने का निर्णय सबसे अहम है। पाकिस्तान में तैनात भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को दिल्ली बुला लिया गया है और दिल्ली स्थित पाकिस्तान के उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ी फटकार लगाई गई है।

साथ में यह उम्मीद भी जताई गई है कि पाक उन ठिकानों को खत्म करे, जहां से सीमा पार करके आतंकवादी भारत में घुसकर इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र संघ, रूस, नेपाल, आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश सहित कई देशों ने पुलवामा हमले की कड़े शब्दों में निंदा भर्त्सना की है। यह आश्चर्य का विषय है कि चीन इस पर चुप्पी साधे हुए है और पाकिस्तान ने फिर वैसी ही सफाई देने की कोशिश की है,

जैसी वह हर बड़े हमले के बाद देता आया है कि इस हमले से उसका कुछ लेना-देना नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमले के अगले ही दिन सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की मीटिंग करके सेना और सुरक्षा बलों को जहां कार्रवाई की खुली छूट देने का फैसला लिया है, वहीं पाक को अलग-थलग करने के लिए बहुत व्यापाक स्तर पर दुनिया भर के देशों के साथ नए सिरे से संपर्क स्थापित करने और कुटिल पड़ोसी की असलियत बताने का फैसला भी लिया है।

इससे साफ संकेत मिलता है कि दुनिया को भरोसे में लेने के बाद भारत पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का मन बना चुका है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को आयोजित दो अलग-अलग कार्यक्रमों में यह भी साफ कर दिया है कि जिसने भी इस वारदात को अंजाम दिया है, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। साफ संकेत हैं कि सेना जल्दी ही उन तत्वों को सबक सिखाने के लिए बड़ी कार्रवाई करेगी,

जिन्होंने सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले की साजिश रची है। यह कार्रवाई क्या सीमा पार बैठे हमलावरों के आकाओं के खिलाफ होगी और उसे कैसे अंजाम दिया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। चाहे अजहर मसूद हो, हाफिज सईद हो या दाऊद इब्राहिम हो, ये सब पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के संरक्षण में वहां से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते आ रहे हैं। मुंबई अटैक हो,

पठानकोट हो या उड़ी का कायरतापूर्ण हमला हो, पाकिस्तान ने हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की है। हालांकि समय-समय पर भारत की ओर से इसके पुख्ता सबूत दिए गए हैं। चाहे नवाज शरीफ वहां प्रधानमंत्री रहे हों या अब इमरान खान हों, वे महज सेना की कठपुतली बनकर काम करते हैं।

भारत और अफगानिस्तान से लेकर कई दूसरे देशों में दहशत फैलाने और उनकी विकास यात्रा को पटरी से उतारने के लिए पाक साजिशों को अंजाम देता आ रहा है। उड़ी और पठानकोट के बाद भारत ने उसे बहुत हद तक पूरी अलग थलग किया है परंतु वहां आतंकियों के जो ठिकाने हैं, वह पूर्ववत जारी हैं क्योंकि वहां की सेना का वरदहस्त आतंकी संगठनों को मिला हुआ है।

यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब भारत में लोस चुनाव सिर पर हैं। ऐसी स्थिति में कुटिल पड़ोसी देश के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करना कितना व्यवहारिक होगा, यह देखने वाली बात है। लेकिन कार्रवाई होगी, यह तय है। अच्छी बात है कि विपक्ष ने संयम का परिचय दिया है और कांग्रेस ने भी सरकार के फैसले का साथ खड़े होने का भरोसा दिया है।

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