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Pulwama Attack Details : पुलवामा आतंकी हमले की पूरी जानकारी

Pulwama Attack Details : पुलवामा घटना में दो बातें संदेह पैदा करती हैं। पहला, सख्त सुरक्षा पहरे के बीच सरहद पार के आतंकी भारी मात्रा में विस्फोटकों से भरा वाहन घटना स्थल तक ले जाने में कैसे सफल हुए? सीआरपीएफ काफिले की पलपल की जानकारी उन तक कैसे पहुंची? दूसरी नाकामी, सीमा पार से तीन सौ किलो प्रतिबंधित विस्फोटक कैसे पहुंची ? इसके लिए क्या किसी ने विभीषण की भूमिका तो नहीं निभाई? ये दोनों सवाल जांच कर रही एनआईए के लिए चुनौती बने हुए हैं।

Pulwama Attack Details : पुलवामा आतंकी हमले की पूरी जानकारी

Pulwama Attack Details : पुलवामा घटना में दो बातें संदेह पैदा करती हैं। पहला, सख्त सुरक्षा पहरे के बीच सरहद पार के आतंकी भारी मात्रा में विस्फोटकों से भरा वाहन घटना स्थल तक ले जाने में कैसे सफल हुए? सीआरपीएफ काफिले की पलपल की जानकारी उन तक कैसे पहुंची? दूसरी नाकामी, सीमा पार से तीन सौ किलो प्रतिबंधित विस्फोटक कैसे पहुंची ? इसके लिए क्या किसी ने विभीषण की भूमिका तो नहीं निभाई? ये दोनों सवाल जांच कर रही एनआईए के लिए चुनौती बने हुए हैं।

घटना को लेकर एक बात और हमें विचलित करती है। सुरक्षा एजेंसियों की पुलवामा हमले को लेकर एक बड़ी चूक भी सामने आई है। भारतीय खुफिया विभाग ने इस तरह के हमले को लेकर आठ फरवरी को अलर्ट जारी किया था। जम्मू कश्मीर पुलिस को भी खुफिया सूचना साझा की गई थीं जिसमें पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद की सुरक्षा बलों पर आत्मघाती हमला करने की धमकी शामिल थी।

सवाल उठता है कि क्यों उस सूचना को हल्के में लिया गया। खुफिया जानकारी में एक वीडियो में आतंकवादी सोमालिया में जवानों पर हमला करते हुए नजर आ रहे थे। वीडियो में जिस तरीके से हमला किया गया है उसी अंदाज में पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर दोहराया गया। घटना अगर सुरक्षा चूक का नतीजा है तो हमें नए सिरे से सोचने की जरूरत है।

घटना से कई घरों के चिराग बुझ गए, कइर्यों की मांग सूनी हो गईं, किसी का बेटा तो किसी का पिता उनसे सदा के लिए दूर हो गया। शहीद होने की खबर मिलने के बाद सैनिकों के घरों में दहाड़ मारती चीखें, चिल्ला-चिल्ला कर बस यही कह रही हैं कि दुश्मनों का नाश कर दो। पुलवामा की आतंकी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। कइंर्यों के घरों में चूल्हे नहीं जले। घटना के बाद लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

आतंकियों के हौसले सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पस्त नहीं हुए। उसका बदला भी आतंकियों ने हमसे ले लिया। इसलिए अब इससके आगे सोचने की जरूरत महसूस होने लगी है। जैश-ए-मौहम्मद ने पुलवामा में बड़ा हमला करके हमें ललकारा जरूर है। पर, इसके बाद पता है कि उसकी खैर नहीं। हमला सैनिकों पर नहीं, बल्कि हर उस भारतीय पर हुआ है जो देश से मोहब्बत करता है।

हमले के बाद पूरा हिंदुस्तान जनाआक्रोश में भर गया है। आवाज उठ रही है कि जल्द से जल्द जैश-ए-मोहम्मद का खल्लास किया जाए। चारों तरफ हमले की निंदा हो रही हैं। विभिन्न दलों के नेता इस वक्त राजनीति से ऊपर उठकर इस कायराना कृत्य पर रोष जता रहे हैं। हमले का इजरायल, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका समेत कई देश विरोध कर रहे हैं।

गुरूवार के दोपहर के वक्त जैसे ही हमले की खबर आई, पूरा देश शोक में डूब गया। इस भयावह हमले के बाद भारत के साथ यूएन ने सहयोग देने की बात कही है। भारत ने यूएन से जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तान में आजाद घूम रहे मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने की मांग की है। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा एक बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य सभी देशों को अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के साथ ही उस पर नकेल कसने के प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

यूएन अगर ऐसा करता है तो भारत के हाथ बड़ी सफलता लगेगी। आतंकवाद से लड़ने की मुहीम को बल मिलेगा। हालांकि पाकिस्तान कभी नहीं चाहेगा कि मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगे। मसूद पाकिस्तान की सबसे बड़ी आतंकी ताकत है। एक तौर पर पाकिस्तान ने सरहद की जिम्मेदारी मसूद को ही सौंप रखी है। भारतीय सीमा में हमला करने के पीछे पाकिस्तानी फौज उसका सहयोग करती है। पुलवामा घटना से पाकिस्तान सरकार खुद को अलग कर रही है। हमले में अपनी भूमिका को नकार रही है।

यह पहली बार हो रहा है जब यूएन भारत के साथ खुलकर खड़ा हुआ हो। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की संयुक्त राष्ट्र ने कड़ी निंदा की है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने शोक संतृप्त परिवारों के लिए संवेदना जताई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से कहा गया, ’हम जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है हमारी उनके प्रति गहरी संवेदना है।

हम सभी घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं और हमले के जिम्मेदार सभी लोगों को जल्द से जल्द कठघरे में लाया जाएगा।’ यूएन का भारत के साथ खड़ा होना, पाकिस्तान को अभी से अखरने लगा है। पाकिस्तान यूएन को खत लिख रहा है जिसमें भारत पर हमले से खुद को पाक साफ बता रहा है।

खैर, अब उसकी कोई दलीलें नहीं चलने वाली, वह पूरी तरह से एक्सपोज हो चुका है। उसको अब बात पता है अगर यूएन ने उनके आका मसूद पर प्रतिबंध लगाया तो उसकी आधी ताकत एक झटके में खत्म हो जाएगी। यूएन की ओर ऐसा कोई निर्णय न लिया जाए इसलिए पाकिस्तान कोई तिगड़म भिड़ाएगा। लेकिन विदेशी नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से मजबूत किया है, उस लिहाज से पाक की अब दाल गलने वाली नहीं। पुलवामा घटना के बाद सैकड़ों मुल्क नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। कई मुल्क प्रधानमंत्री के संपर्क में हैं।

जैश-ए-मोहम्मद का गठन 19 साल पहले भारत के हिस्से वाले कश्मीर को छीनने के मकसद से किया गया था। उसका मुख्य उद्देश्य भारत में दहशत फैलाना और विश्ोषकर जम्मू-कश्मीर में खूनखराबा करना मात्र है। इसके लिए उसे पाकिस्तान के दूसरे आंतकी संगठन और आईएसआई सहयोग करती है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उसने भारत पर बड़े हमले की ठान ली थी। इस बात के इनपुट हमारी खुफिया एजेंसियों के पास थे। क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक में उसके ही आंतकी सबसे ज्यादा मारे गए थे।

तभी से जैश-ए-मोहम्मद के आंतकी बदला लेने के लिए पागल कुत्ते की तरह घूम रहे थे। अब अपना रंग दिखा दिया। लेकिन यह तय है कि इस कृत्य का उन्हें जल्द खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार फुल एक्शन में आ गई है। घटना के कुछ घंटों के बाद ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सुरक्षा एजेंसियों के टॉप अधिकारियों के साथ आपातकाल बैठक कर पूरे घटनाक्रम की बारीकियों से जांच की है।

साथ ही आतंक से निपटने के लिए अब नए सिरे से रणनीति बनाने पर विर्मश हुआ है। जवानों पर हुआ हमला बेहद घृणित है। हमले में शहीद हुए जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। पूरा भारत शहीदों के परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। समय की दरकार आन पड़ी है कि अब सीधे लोहा लिया जाए। सैनिकों की शहादत का माकूल जबाव देने का समय आ गया है।

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