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असम/ नागरिकता विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन, CM सोनोवाल को दिखाए गए काले झंडे

नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ असम में जारी विरोध प्रदर्शन के तहत मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को सोमवार को उनके निर्वाचन क्षेत्र माजुली में काले झंडे दिखाये गये जबकि आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई असमी माघ यानी भोगली बिहू उत्सव के पहले दिन 24 घंटे की भूखहड़ताल पर बैठ गये।

असम/ नागरिकता विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन, CM सोनोवाल को दिखाए गए काले झंडे

नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ असम में जारी विरोध प्रदर्शन के तहत मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को सोमवार को उनके निर्वाचन क्षेत्र माजुली में काले झंडे दिखाये गये जबकि आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई असमी माघ यानी भोगली बिहू उत्सव के पहले दिन 24 घंटे की भूखहड़ताल पर बैठ गये।

सोनोवाल को असोम जातीयताबादी युवा छात्र परिषद (एजेवाईसीपी), कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) और अन्य स्थानीय संगठनों ने लगातार दूसरे दिन काले झंडे दिखाये। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से माजुली पहुंचे थे, जहां उन्हें एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेना था।
जैसे ही उनका हेलीकॉप्टर वहां उतरा प्रदर्शनकारियों ने उनके, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाये और उन्हें काले झंडे दिखाये तथा इस विवादास्पद विधेयक को वापस लेने की मांग की। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और अन्य को वहां से तितर-बितर कर दिया।
रविवार को भी सोनोवाल को असोम जातीयताबदी युवा छात्र परिषद (एजेवाईसीपी) और कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) ने काजीरंगा विश्वविद्यालय के बाहर उन्हें काले झंडे दिखाये। मुख्यमंत्री वहां विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने आये थे।
उल्लेखनीय है कि इस विधेयक में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आये हिंदुओं, जैनियों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों, पारसियों को भारत में छह साल रहने के बाद बिना किसी दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। लोकसभा में पिछले सप्ताह पारित होने के बाद इस विधेयक के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पेश किये जाने की संभावना है।
इस बीच, इस विधेयक के विरोध में के एम एस एस के संस्थापक अखिल गोगोई 70 अन्य संगठनों के नेताओं के साथ यहां चाचल क्षेत्र में सोमवार दो बजे भूखहड़ताल पर बैठ गये। उनके साथ अगप के नेता केशव महंत और पूर्व भाजपा प्रवक्ता मेहदी आलम बोरा भी थे। इस विधेयक के विरोध में महंत ने हाल ही मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया और बोरा ने पार्टी छोड़ दी।
गोगोई, असमी साहित्यकार हिरेन गोहैन और वरिष्ठ पत्रकार मंजित महंत पर इस विधेयक के खिलाफ टिप्पणी करने पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गा था। बाद में तीनों को गुवाहाटी उच्च न्यायालय से जमानत मिल गयी।
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