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पाक में चीन के खिलाफ फुटा गुस्सा, पीओके में जमकर हुआ प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि चीनी कंपनियां पानी का ज्यादा दोहन कर रही हैं।

पाक में चीन के खिलाफ फुटा गुस्सा, पीओके में जमकर हुआ प्रदर्शन

हाल ही में आवामी ऐक्शन फोरम और राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ मुजफ्फराबाद के आम लोगों ने पीओके में कोहला हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद-रावलपिंडी हाईवे को जाम कर दिया और पाक सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि चीनी कंपनियों पानी का ज्यादा दोहन कर रही हैं।

लोगों से विचार विर्मश के बाद हो प्रोजेक्ट पर काम

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि स्थानीय लोगों से विचार-विमर्श किए बगैर प्रॉजेक्ट शुरू नहीं होना चाहिए। आवामी ऐक्शन कमिटी के रजा मुमताज खान ने कहा, चीन की कंपनी ने आवामी एक्शन फोरम के साथ कोई समझौता नहीं किया है और न ही लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए कोई प्रयास किया गया।

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हालत यह है कि दरबनगढ़ और नरोला समेत पूरे क्षेत्र में जल स्रोत सूख रहे हैं।' चीन की सरकारी हाइड्रोपावर डिवेलपर कंपनी द चाइना थ्री जॉर्ज्स कॉर्पोरेशन को जनवरी 2015 में कोहला हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट के डिवेलप करने के अधिकार मिले। 110 एमडब्ल्यू का यह प्रोजेक्ट सीटीजीसी का पाकिस्तान में सबसे बड़ा निवेश है, जो 2021 में पूरा होना है।

निर्माण कार्य की वजह से लोग विस्थापित

गौरतलब है कि पीओके में बांधों के निर्माण और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा गई है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों को निर्माण कार्य के चलते विस्थापित भी किया गया है।

पीअोके के लोग काफी पहले से ही चीनी कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे इन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स का विरोध कर रहे हैं। दरअसल, लोगों को बिजली और नौकरी के अधिकार देने से इनकार कर दिया गया है।

चीनी कंपनी ने 100 कश्मीरी कामगारों को निकाला

हाल ही में एक चीनी कंपनी सीजीसी-सीएमईसी ने नीलम झेलम हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम कर रहे 100 से ज्यादा कश्मीरी वर्कर्स को निकाल दिया था। हटाए गए इन कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया था और नौकरी पर बहाल किए जाने की मांग की।

उन्होंने कहा था कि नौकरी न देने की दशा में उन्हें प्रतिपूर्ति की जाए। पीओके में बांध और पावर स्टेशन का निर्माण करने का कॉन्ट्रैक्ट 7 जुलाई 2007 को सीजीसी-सीएमईसी को दिया गया था।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद उन्हें बर्खास्त किया गया। हालांकि पाकिस्तान ने इन विरोधों को दरकिनार करते हुए विदेशी मदद से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का काम जारी रखा है।

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