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केंद्र सरकार का ब्राह्मणों पर बड़ा दांव, क्या मिलेगा आरक्षण?

केंद्र की मोदी सरकार ने वैदिक ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है।

केंद्र सरकार का ब्राह्मणों पर बड़ा दांव, क्या मिलेगा आरक्षण?

केंद्र की मोदी सरकार ने वैदिक ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, लेकिन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इस प्रस्ताव को अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ बताते हुए विरोध किया है।

इस बात का खुलासा केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ताजा वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 से हुआ है।

इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि वैदिक ब्राह्मणों को हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग करार देते हुए केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया है और ऐसे में इन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।

सरकार के इस कदम का विरोध करने वाले आयोग ने इस प्रस्ताव को अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

इससे पहले इस प्रस्ताव पर गौर करने के लिए केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग से ऐसी सिफारिश करने पर विचार करने को कहा था।

वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार हालांकि अल्पसंख्यक आयोग ने इस प्रस्ताव के बारे में अंतिम फैसला केन्द्र सरकार पर छोड़ दिया है।

आयोग का तर्क

अल्पसंख्यक आयोग ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर अपना तर्क दिया है कि यदि केंद्र सरकार वैदिक ब्राह्मण को अल्पसंख्यक का दर्जा दे देती है तो इसी तरह की मांग राजपूत, वैश्य और दूसरे हिन्दू जातियों के पक्ष से भी आ सकती है, इसलिए सरकार का यह फैसला तर्कसंगत नहीं है।

वैसे भी पिछले कुछ दिनों से हिन्दू समुदाय की कई जातियां भी अपनी पौराणिक अस्मिता और पहचान के आधार पर अल्पसंख्यक दर्जे की मांग करती आ रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपीए सरकार ने जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया था, जिसके बाद अल्पसंख्यक दर्जा वालों में भारत के छह धार्मिक समुदाय मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी शामिल है।

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