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भारत की साक्षरता दर में सुधार तो हुआ, लेकिन द.एशिया के कई देशों से अब भी पीछेः प्रणब मुखर्जी

वर्ष 1951 में भारत की साक्षरता दर मात्र 18 फीसदी थी लेकिन वर्ष 2011 आते-आते यह 72.98 फीसदी तक पहुंच गई है।

भारत की साक्षरता दर में सुधार तो हुआ, लेकिन द.एशिया के कई देशों से अब भी पीछेः प्रणब मुखर्जी
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नई दिल्ली. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्व साक्षरता दिवस के मौके पर यहां राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि देश में साक्षरता की दर में बीते कई दशकों के दौरान सुधार देखने को मिला है। लेकिन फिर भी भारत, द.पूर्व एशिया के कई देशों से इस मामले में पीछे है। ये वो देश हैं जिन्होंने शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य हासिल कर लिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को भी शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में बढ़ना चाहिए। वर्ष 1951 में भारत की साक्षरता दर मात्र 18 फीसदी थी लेकिन वर्ष 2011 आते-आते यह 72.98 फीसदी तक पहुंच गई है। लेकिन आज भी हमें 12वीं पंचवर्षीय योजना में बताए गए साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा साक्षरता में लैंगिग अंतर 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कुल 11 साक्षर भारत पुरस्कार भी वितरित किए।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि मंत्रालय ने मार्च 2016 तक शत-प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने की शपथ ली है। मैं इस तरह की शपथ लेने की अपील आदर्श सांसद ग्राम योजना के तहत आने वाले कुल 410 जिलों के राज्य और जिला जनप्रतिनिधियों से भी करती हूं, जिसे वे अपने-अपने इलाकों में क्रियान्वित करें। केंद्रीय मंत्री ने कहा यह भी खुशी की बात है कि बीते 15 महीनों में 2.28 करोड़ लोग साक्षर हुए हैं। साथ ही वित्तीय साक्षरता की दर में बढ़ोतरी के साथ लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ तक पहुंच गई है। यह वो लोग हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बैंक में अपना खाता खोला है। इतना ही नहीं साक्षरता के प्रयास को विस्तार देने वाले लोगों की वजह से मात्र एक महीने में प्रधानमंत्री जनधन योजना का लाभ 92.7 प्रतिशत लोगों तक पहुंच गया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री (स्कूली शिक्षा) उपेंद्र कुशवाहा ने कहा निरक्षरता मानवता पर एक काला धब्बा है। इसे हटाया जाना बेहद जरूरी है। देश में हर पांचवा व्यक्ति और करीब एक-तिहाई महिलाएं निरक्षर हैं। देश विकास कर रहा है और हम शत-प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य की ओर बढ़ भी रहे हैं लेकिन फिर भी बहुत कुछ किया जाना जरूरी है। कार्यक्रम में 'साक्षरता से सामाजिक सुरक्षा की ओर' टाइटल से एक लघु फिल्म दिखाई गई और यूनेस्को के निदेशक शीगेरू ओयागी ने यूनेस्को के महानिदेशक ईरीना बोकोवा के संदेश को पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम में एचआरडी मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में सचिव एस.सी.खुंटिया, वाईएसके शेषु कुमार (संयुक्त सचिव, प्रौढ़ शिक्षा और महानिदेशक, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण) मौजूद थे।
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