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जीएसटी बिल पर लगी राष्ट्रपति की मुहर

जीएसटी का पारित होना आर्थिक कानूनों में से एक है।

जीएसटी बिल पर लगी राष्ट्रपति की मुहर
नई दिल्ली. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संसोधन बिल को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति को देश के 16 राज्यों द्वारा पारित हो जाने के बाद इस बिल को भेजा गया था। पिछले दिनों ओडिशा विधानसभा ने इसको पास किया था, जिसके बाद 50 फीसदी राज्यों की विधानसभा में इसे पास कराने का जरूरी काम भी पूरा हो गया था। इससे पहले गुरूवार को अरुणांचल प्रदेश विधानसभा ने भी इस बिल को पास कर दिया।
जीएसटी काउंसिल के लिए हुई आसानी
जीएसटी कानून पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद जीएसटी काउंसिल बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। जीएसटी काउंसिल ही टैक्स और सेस का रेट तय करेगी। संसद ने 8 अगस्त को जीएसटी संशोधन बिल को पास किया था। संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इस बिल का 50 फीसदी राज्यों की विधानसभाओं से पास होना जरूरी था।
सुधार की ओर बड़ा कदम
द इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, हाल ही में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जीएसटी अप्रत्यक्ष कराधान में एक बड़ा सुधार है, जो काफी समय से लंबित है। जेटली ने कहा कि हमने बेहद कठोर लक्ष्य रखा है और इसकी वजह है यह कि जीएसटी सुधार के समर्थन में राष्ट्रीय स्तर पर आकांक्षा शामिल है और 20-25 दिन के भीतर राज्य दर दर इसका अनुमोदन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें सबसे अधिक फायदा हो रहा है।
राज्यों से मिला सकारात्मक रुख
राज्यों में मौजूद सरकार भी इसको पास करने में लगी हुई हैं। सभी राज्यों से स्वीकृति मिलने के बाद इसको अनुमोदन के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाना बरकरार है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा स्वीकत प्रदान किए जाने के बाद संविधान संशोधन विधेयक को अधिसूचित किया जाएगा। अधिसूचना जारी करने और जीएसटी परिषद के गठन के बाद निश्चित तौर पर कुछ लंबित मामले हैं जिनका परिषद समाधान करेगी। जेटली ने कहा कि हमारे पास ऐसा करने के लिए सितंबर, अक्तूबर का महीने और नवंबर का कुछ हिस्सा है। बहुत काम करना है।
राज्य रखेंगे अपना कानून
जीएसटी लागू करने के संबंध में समयसीमा के बारे में पूछने पर जेटली ने कहा, राज्यों को अपने कानून पारित करने हैं। अब यदि आप इस पर निगाह डालते हैं तो यह बेहद कठोर लक्ष्य है और हमारे पास समय कम है। मैं निश्चित तौर पर प्रयास करना चाहूंगा। केंद्रीय कानून- जीएसटी और आईजीएसटी- का पारित होना सरकार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक कानूनों में से एक है।
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