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प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल के दो साल पूरे, मेहमानवाजी में ही गुजरा ज्यादातर समय

अपने पूर्ववर्ती प्रतिभा पाटिल के विपरीत मुखर्जी ने राष्ट्रपति के रूप में इन दो सालों में दो बार में केवल तीन देशों की यात्रा की।

प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल के दो साल पूरे, मेहमानवाजी में ही गुजरा ज्यादातर समय
नई दिल्ली.राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जो दो साल राष्ट्रपति भवन में गुजारे उसमें उन्होंने बतौर राष्ट्राध्यक्ष यात्राएं करने के बजाए नम्र मेजबान के रूप में अधिक रुचि दिखाई।
अपने पूर्ववर्ती प्रतिभा पाटिल के विपरीत मुखर्जी ने राष्ट्रपति के रूप में इन दो सालों में दो बार में केवल तीन देशों , बेल्जियम, तुर्की और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की। प्रतिभा ने अपने पांच साल के कार्यकाल में 23 देशों की यात्रा की थी और उस पर 223 करोड़ रुपए का खर्च आया था। लेकिन ऐसा नहीं है कि विदेश यात्रा नहीं करने से मुखर्जी के राजनयिक प्रयासों पर कोई असर पड़ा हो, क्योंकि उन्होंने भव्य राष्ट्रपति भवन में अबतक 75 विदेशी गणमान्य अतिथियों की मेजबानी की। राष्ट्रपति के रूप में दूसरे साल में 78 वर्षीय मुखर्जी ने 33 विदेशी गणमान्य मेहमानों का स्वागत सत्कार किया यानी हर दसवें दिन राष्ट्रपति भवन में एक विदेशी मेहमान का आगमन हुआ। जापान के सम्राट के अलावा, भूटान नरेश, श्रीलंका, मालदीव, अफगानिस्तान और र्जमनी के राष्ट्रपति भी यहां की खातिरदारी के कायल हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री, वियतनाम के कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव, बांग्लादेश की संसद के अध्यक्ष और चीन के विदेश मंत्री ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों में शामिल हैं जिनकी मुखर्जी ने इन दो सालों में मेजबानी की। राष्ट्रपति भवन में उनके दो साल 25 जुलाई को पूरे हो रहे हैं। उन्होने देश के तेरहवें राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई 2012 को राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली थी। राष्ट्रपति बनने से पहले वे यूपीए सरकार मे वित्त मंत्री थे । वे विदेश मंत्री के तौर पर भी यूपीए सरकार में अपनी सेवाएँ दी थी।
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