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मंत्री पद वापस पाते ही मुलायम के पैरों पर लेट गए गायत्री प्रजापति

अवैध खनन आरोपी रहे गायत्री प्रजापति की एक बार फिर से कैबिनेट में वापसी हो गई है।

मंत्री पद वापस पाते ही मुलायम के पैरों पर लेट गए गायत्री प्रजापति
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के कैबिनेट विस्तार में अजीबो-गरीब नजारा देखने को मिला। अखिलेश यादव के 8वें मंत्रिमंडल विस्‍तार में सोमवार को कुल 10 मंत्रियों ने कैबिनेट पद की शपथ ली। बर्खास्‍तगी के 15 दिन बाद गायत्री प्रजापति ने चौथी बार मंत्री पद की शपथ ली।
अवैध खनन आरोपी रहे गायत्री प्रजापति की एक बार फिर से कैबिनेट में वापसी हो गई है। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद प्रजापति सीधे मुलायम सिंह के पैरों पर दंडवत हो गए। इतना ही नहीं, गायत्री प्रजापति ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पैर भी छुए।
हालांकि राज्यपाल राम नाईक को यह बात नागवार गुजर गई और उन्होंने तुरंत टोकते हुए अनुशासन बनाए रखने की बात कही।
मंत्री नहीं बनाया सिर्फ सिफारिश की
कैबिनेट विस्तार के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को कहा कि उन्होंने गायत्री प्रजापति को मंत्री नहीं बनाया सिर्फ सिफारिश की।
मीडिया से बातचीत करते हुए, मुलायम ने कहा, 'मैंने गायत्री प्रजापति को मंत्री नहीं बनाया। मैंने सिर्फ मुख्यमंत्री से उनकी सिफारिश की। अच्छा है कि मुख्यमंत्री ने मेरी बात मान ली।'
मुलायम ने कहा, 'गायत्री प्रजापति पिछड़े विरादरी से आते हैं. वह एक कर्मठ कार्यकर्ता है और पार्टी के वफादार हैं।'
शपथ समारोह में अभिषेक मिश्र, नरेंद्र वर्मा, अंबेडकरनगर से विधायक शंखलाल मांझी ने राज्‍य मंत्री से प्रमोट होकर कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली। वहीं, हाजी रियाज, यासिर शाह, रविदास मल्‍होत्रा ने स्‍वतंत्र प्रभार से प्रमोट होकर कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली।
समारोह में गायत्री प्रजापति को वापस लिए जाने को चुनौती
लखनऊ के एक जाने-माने समाजसेवी ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक को अर्ज़ी देकर राज्य मंत्रिमंडल में सोमवार को होने जा रहे शपथग्रहण समारोह में गायत्री प्रजापति को वापस लिए जाने को चुनौती दी है। समाजसेवी नूतन ठाकुर ने कहा कि प्रजापति को मंत्री के तौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की वजह से हटाया गया था, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध खनन में सरकारी पदाधिकारियों की शिरकत के आरोपों की जांच करने के निर्देश सीबीआइ को दिए थे।
कोर्ट जल्द ही प्रजापति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला दे सकता है
बता दें कि चाचा-भतीजे विवाद में जब गायत्री प्रजापति को अखिलेश सरकार के मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया गया था, तब ये तर्क दिया गया था कि अवैध खनन मामले में प्रजापति के खिलाफ सीबीआई के पास मजबूत साक्ष्य हैं और इलाहाबाद कोर्ट जल्द ही उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाई का फैसला दे सकता है।
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