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आरुषि हत्याकांड की तरह कहीं उलझ न जाए प्रद्युम्न हत्याकांड की पहेली?

8 सितंबर को रयान स्कूल में कक्षा दो के छात्र की स्कूल के टॉयलेट में हत्या कर दी गई थी।

आरुषि हत्याकांड की तरह कहीं उलझ न जाए प्रद्युम्न हत्याकांड की पहेली?

गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न की टॉयलेट में हत्या कर दी गई। जिसके बाद पुलिस ने जांच की और आरोपी कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही गुरुग्राम पुलिस ने यह भी दावा किया कि जांच बिल्कुल सही दिशा में है और बस कंडक्टर ही इस ह्या का आरोपी है। लेकिन गुरुवार को सीबीआई के इस केस में खुलासे ने सबको हैरान करके रख दिया।

सीबीआई ने रयान स्कूल के ही 11वीं के छात्र को इस हत्या का आरोपी बताया है। इस हत्या के बाद जिस तरह से मामले में पुलिस और सीबीआई की थ्योरी अलग-अलग है, उससे जानकारों का यही मानना है कि आरुषि मर्डर केस की तरह कहीं प्रद्युम्न की हत्या की गुत्थी भी उलझ कर न रह जाए।

8 सितंबर को रयान स्कूल में कक्षा दो के छात्र की स्कूल के टॉयलेट में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया। इसके बाद आरोपी बस कंडक्टर को इस मामले में गिरफ्तार किया।

पुलिस का जांच का एंगल था कि प्रद्युम्न ने कंडक्टर अशोक को टॉयलेट में गलत काम करते देखा, जिसके बाद आरोपी ने उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी अशोक ने मीडिया के सामने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया। इसके बाद से ही इस मामले में नए-नए मोड़ आने लगे।

थर्ड डिग्री देकर जुर्म कबूल कराया

जेल जाने के बाद आरोपी ब कंडक्टर अशोक और उसके वकील का कहना था कि उसने हत्या नहीं की। यह झूठ बोलने के लिए उसे 25 लाख का ऑफर दिया गया और थर्ड डिग्री देकर जबरदस्ती जुर्म कबूल कराया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने केस सीबीआई को सौंप दिया गया।

सीबीआई को छात्र पर हुआ शक

सीबीआई ने इस मामले में अपने तरीके से जांच शुरू की। जिसमें स्कूल में कई जगह पर खुदाई हुई, बार-बार CCTV खंगाले गए। आरोपी छात्र से 4 बार पूछताछ भी की गई। जिसके बाद सीबीआई ने कहा कि छात्र के बयान में बार-बार बदलाव के कारण उन्हें उस पर शक हुआ।

साथ ही सीबीआई का कहना है कि आरोपी स्टूडेंट सीसीटीवी में भागता दिख रहा है। हत्या के बाद उसी ने सबसे पहले प्रद्युम्न को टॉयलेट में पड़ा देखा था। जिसके बाद शक की सूई उसकी ओर घूम गई। पुलिस और सीबीआई की थ्योरी को देखते हुए कानून के जानकारों का मानना हैं इस केस को देखकर लगता है कि कहीं यह केस आरूषि केस की तरह न निकल जाए।

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