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चीन में मोदी : पीएम का दो दिवसीय दौरा बन सकता है एतिहासिक, डोकलाम समेत इन मुद्दों पर होगी बातचीत

चीन का वुहान शहर आज 27 और 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए तैयार है। इस बैठक को लेकर चीनी मीडिया भी काफी उत्साहित है।

चीन में मोदी : पीएम का दो दिवसीय दौरा बन सकता है एतिहासिक, डोकलाम समेत इन मुद्दों पर होगी बातचीत
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चीन का वुहान शहर आज 27 और 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए तैयार है। इस बैठक को लेकर चीनी मीडिया भी काफी उत्साहित है।

मीडिया ने मोदी-चिनफिंग की होने वाली बैठक को दोनों देशों के रिश्ते में नए अध्याय की शुरुआत बताया गया है। कहा गया है कि दोनों देशों के बीच एक दूसरे के प्रति अविश्वास की भावना है जो डोकलाम में 72 दिनों तक चले सैन्य गतिरोध के बाद और बढ़ी है।

उम्मीद जताई गई है कि इस अनौपचारिक शिखर बैठक से दोनों देशों के रिश्तों में जारी तनाव को कम करने और आपसी विश्वास बहाली में मदद मिलेगी।

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कहा जा रहा है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अनौपचारिक शिखर बैठक का उद्देश्य सिर्फ जून में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के शिखर सम्मेलन की तैयारी नहीं है बल्कि समकालीन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा और रणनीतिक संवाद है।

डोकलाम मुद्दे का भी जिक्र

मीडिया द्वारा डोकलाम गतिरोध का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पिछले साल जून से अगस्त के बीच 72 दिनों तक डोकलाम में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध चला और जंग जैसी स्थिति हो गई थी।

दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास की कमी की वजह से डोकलाम में टकराव हुआ था, जिससे 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।

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दोनों में विश्वास की कमी

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों में आपसी विश्वास की कमी है और दोनों एक दूसरे को शक की निगाह से देखते हैं। भारत चीन को लेकर चिंतित और सशंकित रहता है। वहीं चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का विरोध किया।इसके अलावा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के लिए भारत की सदस्यता का भी चीन ने यह कहकर विरोध किया कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए।

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