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1965 के युद्ध का पराक्रम, बलिदान हमारे संस्मरण में रचे बसे हैं: मोदी

इंडिया गेट के लॉन में आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री करीब दो घंटे तक रहे और वहां प्रदर्शित वस्तुओं में रुचि दिखाई।

1965 के युद्ध का पराक्रम, बलिदान हमारे संस्मरण में रचे बसे हैं: मोदी

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1965 के भारत-पाक युद्ध की स्वर्ण जयंती को सर्मपित सैन्य प्रदर्शनी 'शौर्यांजलि' देखने गए और कहा कि इस युद्ध में हमारे सशस्त्र बलों का पराक्रम और बलिदान प्रत्येक भारतीय के संस्मरण में हमेशा रचा बसा रहेगा। मोदी ने ट्वीट किया, 'शौर्यांजलि में कुछ समय बिताया, जो साल 1965 के युद्ध की स्वर्ण जयंती को सर्मपित प्रदर्शनी है। 1965 के युद्ध के दौरान हमारे सशस्त्र बलों का पराक्रम और बलिदान प्रत्येक भारतीय के संस्मरण में रचा बसा है। हमें उस पर गर्व है।

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इंडिया गेट के लॉन में आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री करीब दो घंटे तक रहे और वहां प्रदर्शित वस्तुओं में रुचि दिखाई। इसमें पकड़े गए पाकिस्तानी पैटन टैंक और शेरमन टैंक के साथ मील का पत्थर 'लाहौर 13 किलोमीटर' भी शामिल है। इस मील के पत्थर को भारतीय सेना लौहार से लाई थी। इससे यह साबित होता है कि हमारी सेना पाकिस्तान में कितने अंदर तक घुस गई थी। यह प्रदर्शनी 700 मीटर क्षेत्र में लगाई गई है और इसमें कच्छ के रण से लेकर ताशकंद शिखर सम्मेलन तक विभिन्न आयामों को दर्शाया गया है।

इसमें विभिन्न युद्ध के दृश्यों को भी दर्शाया गया है। 1965 के युद्ध को सर्मपित इस प्रदर्शनी को देखने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और जल संसाधन मंत्री उमा भारती गई थीं। प्रधानमंत्री को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने युद्ध के विभिन्न आयामों के बारे में जानकारी दी।
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