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पीएम मोदी, असम, ब्रह्मपुत्र नदी, और भारत के सबसे लम्‍बे रेल-सड़क पुल बोगीबील से चीन बेचैन

भारत के सबसे लम्‍बे रेल-सड़क पुल बोगीबील से असम-अरुणाचल की दूरी 100 किलोमीटर कम हो जाएगी और यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर तथा दक्षिणी तटों को जोड़ता है इसके साथ ही यह एक पुल चीन के 11 पुल के बराबर है।

पीएम मोदी, असम, ब्रह्मपुत्र नदी, और भारत के सबसे लम्‍बे रेल-सड़क पुल बोगीबील से चीन बेचैन

पहले की सरकारों ने पूर्वोत्तर के समुचित विकास पर ध्यान नहीं दिया। राजग सरकार पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर ध्यान दे रही है। इसे लोग पसंद भी कर रहे हैं और इसलिए सेवन सिस्टर्स के नाम से मशहूर पूर्व के राज्यों से कांग्रेस का सफाया हो गया है। दरअसल, लंबे समय तक किसी क्षेत्र विशेष की आप उपेक्षा नहीं कर सकते।

कांग्रेस की गलत नीतियों के चलते विकास नहीं होने से ही पूर्वोत्तर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हुईं, वहां उग्रवाद को जड़ जमाने का अवसर मिला। मौजूदा मोदी सरकार लगातार पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर ध्यान दे रही है और यह संतोष का विषय है कि वहां टकराव के जो भी मुद्दे थे, वे समाप्त हो रहे हैं या न्यूनतम हो रहे हैं।

असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे 4.94 किलोमीटर रेल-रोड पुल बोगीबील के शुरू होने से पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है। एशिया के इस दूसरे सबसे बड़े पुल में सबसे ऊपर एक तीन लेन की सड़क है और उसके नीचे दोहरी रेल लाइन है। भूकंपरोधी यह पुल ब्रह्मपुत्र के जलस्तर से 32 मीटर की ऊंचाई पर है।

इसे स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाले पुल की तर्ज पर बनाया गया है। इससे असम-अरुणाचल की दूरी 100 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर तथा दक्षिणी तटों को जोड़ता है। यह एक पुल चीन के 11 पुल के बराबर है। इस पर भारी सैन्य टैंक आसानी से गुजर सकेंगे। इससे पहले असम व अरुणाचल प्रदेश के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर ही देश के सबसे लंबे 9.15 किलोमीटर धोला-सादिया सड़क पुल भी चालू हुआ था।

इसी साल मेघालय की राजधानी शिलांग में देश की सबसे ऊंची सड़क का लोकार्पण हुआ था, जिसका एयरफोर्स के लिए हवाईपट्टी के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इस सड़क के समानान्तर एयरपोर्ट का भी निर्माण किया जा रहा है। संयोग की बात है कि इन तीनों ही प्रोजेक्ट के उदघाटन का अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला।

देश में जिस तरह पश्चिम व मध्य भारत में विकास हुआ, वैसा पूर्वोत्तर में नहीं हुआ। पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा) में इन्फ्रास्ट्रक्चर, उद्योग-धंधे, कानून-व्यवस्था आदि पहले बहुत कमजोर रहे हैं। इसके चलते ही इस क्षेत्र के लोग नई दिल्ली समेत शेष भारत से अपना जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते थे।

मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर पर ध्यान देकर उनका देश से जुड़ाव बढ़ाया है। अब उनके लिए दिल्ली, मुंबई दूर नहीं रह गए हैं। खास बात है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र चीन की सीमा से सटे हुए हैं। इसलिए सामरिक दृष्टि से भी इन क्षेत्रों में मजबूत कनेक्टिविटी जरूरी है। सीमाई क्षेत्र में चीन की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए भारत का सामरिक रूप से मजबूत रहना जरूरी है।

1962 युद्ध के बाद 1965 में इस पुल को बनाने की मांग उठी थी। ब्रह्मपुत्र पर पहले सबसे लंबे पुल व अब सबसे लंबे रेल-रोड पुल से चीन सीमा तक भारत की सामरिक पहुंच और सुलभ हो गई। गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में जलमार्ग के विकसित होने से भी इस क्षेत्र में संपर्क बढ़ेगा। बिहार, बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्य विकास यात्रा में पिछड़ गए हैं।

पीएम मोदी भी इस बात का जिक्र करते हैं कि इन राज्यों में विकास के बिना भारत की खुशहाली की कल्पना नहीं की जा सकती है। इन राज्यों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने से देश की जीडीपी दर और तेजी से बढ़ेगी। इन क्षेत्रों में रोड-रेल व जल संपर्क बढ़ने से रोजगार भी बढ़ेंगे और आर्थिक मजबूती भी आएगी। अच्छी बात है कि अब धीरे-धीरे पूर्वोत्तर भारत भी विकास यात्रा में शामिल हो रहा है।

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