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बांग्लादेश में ''शेख हसीना'' का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए क्यों जरूरी है

बांग्लादेश के आम चुनाव 2018 में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग (Awami League) ने जीत हासिल की है। अवामी लीग की यह जीत अकेले शेख हसीना की नहीं है। बल्कि गठबंधन ''ग्रैंड एलायंस'' की जीत है। जिसका नेतृत्व शेख हसीना करती हैं।

बांग्लादेश में
बांग्लादेश के आम चुनाव 2018 में शेख हसीना (Sheikh Hasina) की पार्टी अवामी लीग (Awami League) ने जीत हासिल की है। अवामी लीग की यह जीत अकेले शेख हसीना की नहीं है। बल्कि गठबंधन 'ग्रैंड एलायंस' की जीत है। जिसका नेतृत्व शेख हसीना (Sheikh Hasina) करती हैं। 300 सदस्यों वाले बांग्लादेश (Bangladesh) की लोकसभा में ग्रैंड एलायंस ने 288 सीटें जीती हैं। 96 प्रतिशत सीटों पर ग्रैंड एलायंस की जीत हुई है जो कि काफी अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी इस जीत के लिए शेख हसीना (Sheikh Hasina) को बधाई दी। आज हम आपको बता रहे हैं कि बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

बांग्लादेश की संसद

बांग्लादेश की संसद को 'जातीय संसद' (jatiya sangsad) या हाउस ऑफ नेशन कहा जाता है। यहां पर हम सीधे संसद की बात करते हैं। क्योंकि बांग्लादेश में भारत की तरह संसद में दो सदन (उच्च सदन और निम्न सदन) नहीं होते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश के संसद में कुल 350 सीट हैं।

उनमें से सिर्फ 300 सीट पर चुनाव होता है। बाकी की 50 सीट आरक्षित होती हैं। उन 50 सीटों पर कौन काबिज होगा इसका निर्णय जीतने वाली पार्टी करती है। यहां कोई भी बिल जीतने वाली पार्टी ला सकती है। जैसा कि भारत में होता है कि किसी भी सदन में बिल पास होने के बाद उसे दूसरे सदन में भी पास करना पड़ता है।
वहीं बांग्लादेश में इसकी जरूरत नहीं पड़ती है। इस हिसाब से देखा जा सकता है कि शेख हसीना इस समय बांग्लादेश में कितनी ताकतवर हैं। यह उनकी चौथी बार जीत है। जिसके बाद वह बांग्लादेश में सबसे ज्यादा लंबे कार्यकाल वाली प्रधानमंत्री बन जाती हैं।

बांग्लादेश में राजनीतिक पार्टियां

बांग्लादेश में कई छोटी-छोटी पार्टियां हैं। लेकीन राष्ट्रीय स्तर पर केवल दो बड़ी पार्टियां है। पहली पार्टी है अवामी लीग जिसका नेतृत्व शेख हसीना कर रही हैं। वहीं दूसरी प्रमुख पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) है। अवामी लीग के गठबंधन को ग्रैंड एलायंस कहते हैं। वहीं बीएनपी की गठबंधन पार्टी जतिया ओकिया फ्रंट (JOF) है।

आवामी लीग और बीएनपी दोनों की विचारधारा बेहद अलग-अलग है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का मानना है कि भारत एक बेहद बड़ा देश है, साथ ही वह पड़ोसी देश है इस लिए उसके साथ हमेशा बना कर चलना चाहिए। सरल भाषा में कहें तो शेख हसीना की पार्टी भारत से मैत्री संबंध बनाकर चलने में विश्वास रखती है।

ऐसा इस लिए भी क्योंकि बांग्लादेश अपनी 90 प्रतिशत भू-सीमा भारत के साथ साझा करता है। साथ ही बांग्लादेश ब्रह्मपुत्र नदी से अपनी प्यास बुझाता है।

वहीं BNP की विचारधारा के मुताबिक बांग्लादेश का पाकिस्तान से अच्छा संबंध होना चाहिए वहीं भारत के साथ ज्यादा अच्छे संबंध नहीं होने चाहिए। बीएनपी का इतिहास रहा है कि जब भी बीएनपी की सरकार सत्ता में आती है। तब-तब बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ने लगता है।

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बांग्लादेश आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने लगता है। कई बार तो यह भी देखा गया है कि बांग्लादेश में आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) समर्थन देती है। उसके बाद जब भी कोई रेलवे का प्रोजेक्ट, ऊर्जा का प्रोजेक्ट हो तो BNP चाहती है कि यह पाकिस्तान के साथ मिलकर स्थापित हो।

इससे यह समझा जा सकता है कि बांग्लादेश में BNP की सरकार आने से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आवामी लीग ने सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान हाई कमीशन पर यह आरोप भी लगाए हैं कि वह आतंकवादी ग्रुप को मदद देता है। आवामी लीग विकास को देखती है। उसका मानना है कि आतंकियों को समर्थन देने से केवल नुकसान ही होगा।

बीएनपी क्यों नहीं जीत पाई

बीएनपी की हार का सबसे बड़ा कारण है उसके अंदर की लड़ाई। बीएनपी की नेता बेगम खालिदा जिया (Begum Khaleda Zia) थीं। बेगम खालिदा जिया इस समय जेल में हैं। क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें 5 साल की सजा हुई है। उनकी उनुपस्थिति में आखिर BNP का नेता कौन होगा इस बात की लड़ाई चल रही है।
पार्टी के कुछ लोग बेगम जिया के बेटे को नेता मानते हैं जो अभी इंग्लैंड में है। वहीं कुछ लोग कमल हुसैन (Kamal Hossain) को अपना नेता मानते हैं। इस आपसी लड़ाई के कारण बीएनपी सत्ता में नहीं आ पाई।

भारत के लिए बांग्लादेश में 'हसीना' की जीत

बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत से भारत को राहत है। क्योंकि एक तो बांग्लादेश और भारत 4000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। देखा गया है कि शेख हसीना की सरकार में सीमा का कोई भी बड़ा विवाद सामने नहीं आया है। आने वाले समय में बांग्लादेश चाहता है कि वहां पर न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया जाए।

जिसमें भारत और रूस मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही बांग्लादेश और भारत SAARC, BIMSTEC, IORA और कॉमनवेल्थ जैसे कई ग्रुपों में एक साथ हैं। सार्क में पाकिस्तान के होने के कारण उसकी एक्टिविटी न के बराबर है। वहीं बिम्स्टेक देशों के साथ भारत ने पुणे में सैन्य अभ्यास किया था।

इसमें नेपाल ने भाग नहीं लिया था जो कि भारत के लिए एक चिंता का विषय था। वहीं बांग्लादेश ने शेख हसीना की सरकार के नेतृत्व में इसमें हिस्सा लिया था। साथ ही बांग्लादेश और भारत के बीच कई सारे सांस्कृतिक संबंध हैं। इसी लिए बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार होना भारत के लिए अच्छी खबर है।

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