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पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की खुशी को लगा झटका, एक्साइज ड्यूटी कम होने के बाद भी नहीं घटे दाम, जानें वजह

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए कम कर दी, लेकिन इसका फायदा सीधा कस्टमर्स को नहीं मिलेगा।

पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की खुशी को लगा झटका, एक्साइज ड्यूटी कम होने के बाद भी नहीं घटे दाम, जानें वजह

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए कम कर दी, लेकिन 8 फीसदी रोड सेस लगा दिया। एक्साइज ड्यूटी कम करके इसे सेस में कन्वर्ट कर दिया गया है। लेकिन, इसका फायदा सीधा कस्टमर्स को नहीं मिलेगा। मतलब ये हुआ कि आम जनता को एक्साइज ड्यूटी कम होने का फायदा नहीं मिलेगा। यानी पेट्रोल-डीजल सस्ते नहीं होंगे।

सरकार ने क्या किया

दो रुपए की बेसिक एक्साइज ड्यूटी कम की। 6 रुपए की एडिशनल एक्साइज ड्यूटी खत्म की। बदले में 8 रुपए प्रति लीटर रोड सेस लगा दिया। 8 का फायदा हो सकता था, लेकिन ये फायदा रोड सेस में चला जाएगा। इस सेस से जो पैसा सरकार के पास आएगा उसका इस्तेमाल नए हाईवे और रोड बनाने तथा उनके मेंटेनेंस में किया जाएगा।

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पिछले साल घटाई गई थी एक्साइज ड्यूटी

सरकार ने एक्साइज ड्यटी 2 रुपए प्रति लीटर कम करने का एलान किया। कुछ दिनों पहले तेल मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को लेटर लिखकर कहा था कि एक्साइज ड्यूटी अब कम की जानी चाहिए।

उल्लेखनिय है कि मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 80 रुपए हो चुकी है। ये रिकॉर्ड हाई है। सरकार ने ब्रांडेड और अनब्रांडेड दोनों तरह के पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई है। पिछले साल अक्टूबर में आखिरी बार एक्साइज ड्यूटी घटाई गई थी। तब पेट्रोल का दाम देश भर में करीब 80 रुपए प्रति लीटर होने वाला था।

सरकार पर बोझ बढ़ेगा

एक्साइज ड्यूटी करके सरकार ने हैरान करने वाला कदम उठाया है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता जा रहा है। इसकी वजह से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स महंगे होते जा रहे हैं। फिलहाल, ब्रेंट क्रूड ऑयल 68 डॉलर प्रति बैरल है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रेट आने वाले दिनों में 80 या 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। यानी सरकार के लिए मुसीबतें बढ़ेंगी। तीन साल पहले जब क्रूड ऑयल की कीमतें कम हुईं थीं तब सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 12 रुपए और डीजल पर 13.77 रुपए बढ़ाकर अपना खजाना भर लिया था।

जीडीपी पर पड़ेगा बुरा असर

इकानोमिक सर्वे 2018 में कहा गया था कि कच्चा तेल अगर 10 डॉलर प्रति बैरल की रफ्तार से इसी तरह बढ़ता रहा तो जीडीपी को इससे 0.2 से 0.3% का हर साल नुकसान होगा। और इससे वित्तीय घाटा भी 9 से 10 बिलियन हर साल बढ़ जाएगा।

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