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घाटी में शांति के लिए अलगाववादियों को लगाया जा रहा है ठिकाने

घाटी में अशांति के कारण मरने वालों की संख्या 69 हो गई है।

घाटी में शांति के लिए अलगाववादियों को लगाया जा रहा है ठिकाने
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श्रीनगर. घाटी में अलगाववादियों के द्वारा हिंसा फैलाने को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र के अधिकारियों ने दो शीर्ष अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक को गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत हिरासत में ले लिया है। शुक्रवार को पुलवामा में एक अन्य युवक की मौत के बाद घाटी में अभी भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। घाटी में अशांति के कारण मरने वालों की संख्या 69 हो गई है।
आपको बता दें, जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था जिसे शनिवार को नई दिल्ली भेजा जाएगा। जाहिर तौर पर यासीन को एम्स में एक चेक-अप के लिए दिल्ली भेजा जा रहा है।
तीन हुर्रियत पुरुषों ने जून में एक 'संयुक्त प्रतिरोध शक्ति' समूह का गठन किया था ताकि सैनिक कॉलोनी के लिए प्रस्तावित स्थापना, कश्मीरी पंडितों के लिए एक अलग क्लस्टर और औद्योगिक नीतियों जिसमें राज्य में 90 साल के लिए गैर-स्थानीय लोगों को भूमि के पट्टे दिए जाने हैं उसके खिलाफ आंदोलन कर सके।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि हुर्रियत के कट्टरपंथी गिलानी को उसके हाइडरपोरा आवास पर हिरासत में ले लिया गया और किसी को भी उससे मिलने से रोक दिया गया था। उदारवादी हुर्रियत गुट के हेड मीरवाइज के खिलाफ चेशमाशाही पर्यटन स्थल पर एक जम्मू-कश्मीर पर्यटन विकास में दर्ज कराई गई थी।
जेकेएलएफ ने अपने एक बयान में कहा कि अधिकारियों के द्वारा यासीन को दिल्ली के एम्स में उसके मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा था। एक प्रवक्ता ने कहा कि अधिकारियों ने श्रीनगर के केंद्रीय कारागार में जेकेएलएफ के चेयरमैन से संपर्क किया और डॉक्टरों द्वारा निर्धारित दोनों अलगाववादियों का चिकित्सा परीक्षण कराने की सलाह दी जो श्रीनगर में उपलब्ध नहीं हैं।
शुक्रवार को पुलवामा में मारा गया युवक का नाम शकील अहमद गनई था। राजपोरा एरिया में सख्त कर्फ्यू के बावजूद लोगों ने 'ईदगाह चलो' के नाम से एक आह्वाहन किया था जिसको विफल करने के लिए सुरक्षा बलों ने एक कड़ा कदम उठाया जिसमें युवक की मौत हो गई। घाटी में शुक्रवार की नमाज अदा करने के बाद लोग इस घटना के खिलाफ भड़क उठे।
सूत्रों ने बताया कि गनई की मौत की खबर इतनी जल्दी फैल गई कि सैकड़ों लोग राजपोरा गांवों में सड़कों पर उतर आएं और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन मे उनके द्वारा प्रो-आजादी और भारत विरोधी नारे लगाए गए। सुरक्षा बलों पर लोगों ने भारी पथराव किया जिसमें सुरक्षा बलों को जवाब में आंसू गैस के गोले और छर्रों से फायरिंग करनी पड़ी जिसमें आठ लोगों के घायल होने की खबर है।
केंद्र राज्यपाल वोहरा को हटाने की सोच रही है
केंद्र जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए राज्यपाल एन.एन वोहरा को हटाने की सोच रही है। सरकार के सूत्रों ने शुक्रवार को टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कुछ संभावित उम्मीदवारों की पहले से ही पहचान की गई है। हालांकि अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। वोहरा जो एक अनुभवी केंद्रीय गृह सचिव रह चुके हैं उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के प्रधान सचिव के रूप में सेवा की है और जम्मू-कश्मीर पर केंद्र के वार्ताकार रह चुके हैं। उन्हें राज्यपाल के कार्यालय में समृद्ध अनुभव हासिल है।
हालांकि, घाटी में लंबे समय तक अशांति के बाद से ऐसा लग रहा है कि वोहरा घाटी में हालात को जो जिहादी तत्वों के द्वारा उत्पन्न की गई है उसे नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं।
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