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बिना शिक्षक के कैसे पढ़ेगा ''इंडिया''?

संसद की स्थायी समिति ने देशभर के शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को फटकार लगाई।

बिना शिक्षक के कैसे पढ़ेगा

केंद्रीय-राज्य विश्वविद्यालयों, आईआईटी, आईआईएम, जैसे उच्च-शिक्षण संस्थानों में फैकेल्टी की भारी कमी को लेकर संसद की स्थायी समिति ने शुक्रवार को एचआरडी मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अगर वह समस्या का वास्तविक हल निकालना चाहती है तो उसे मिशन मोड में काम करना पड़ेगा।

अपनी सिफारिशों में समिति ने मंत्रालय के इस बाबत किए गए प्रयासों को अपर्याप्त बताया और कहा कि इनसे समस्या का केवल अस्थायी समाधान होगा। जबकि देशभर में शिक्षको की कमी को समाप्त करने के लिए कोई स्थायी समाधान सरकार को निकालनी चाहिए।

शिक्षकों की इस कमी से सबसे ज्यादा प्रभाव उच्च-शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण कारक गुणवत्ता पर पड़ रहा है। विभाग को इस संबंध में एक निश्चित समय सीमा बनाकर काम करना चाहिए। साथ ही सेवानिवृत होने वाले लोगों को भावी लक्ष्य प्राप्ति के कार्यों में शामिल करना चाहिए।

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केंद्रीय विवि में खाली हैं दो-तिहाई पद

आंकड़ों के हिसाब से केंद्रीय विवि में शिक्षकों के 16 हजार 600 स्वीकृत पदों में से 5 हजार 928 पद खाली पड़े हुए हैं। इसमें प्रोफेसर के 1 हजार 277, एसोसिऐट प्रोफेसर के 2 हजार 173, अस्सिटेंट प्रोफेसर के 2 हजार 478 पद खाली हुए हैं।

समिति ने अपनी टिप्पणी में कहा कि फैकेल्टी की सेवानिवृति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष कर देना एक अस्थायी समाधान है। जबकि शिक्षण कार्य के लिए आने वाले नए शिक्षकों की सालाना घटती तादाद समस्या की जटिलता को बढ़ा रही है।

यूजीसी ने पीएचडी, एमटेक और पोस्ट डाक्टोरल कार्यक्रमों की संख्या में इजाफा किया है। लेकिन इससे छात्रों में उत्साह नहीं बन पा रहा है। वर्ष 2013-14 में पीएचडी करने वाले छात्रों की 552 थी। 2014-15 में यह घटकर 466 हुई और 2015-16 में 382 हो गई।

एम.टेक करने वाले छात्रों का आंकड़ा क्रमश: 267, 188 और अब घटकर 102 हो गया है। इसी तरह से ट्रेनी टीचर स्कीम को लेकर आए 50 प्रस्तावों में से केवल एक की सिफारिश विशेषज्ञ समिति ने स्वीकार की, क्योंकि उसे लगता है कि सरकार को इस विषय की गंभीरता को समझते हुए निदान निकालने के लिए मिशन मोड में काम करने की आवश्यकता है।

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रूसा पर भी नाराजगी

रूसा को लेकर केंद्र-राज्य समन्वय, निगरानी को लेकर एचआरडी द्वारा बनाए गए तंत्र से इच्छित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। 75 फीसदी से ज्यादा फंड का अभी तक उपयोग नहीं हो सका है। समस्या को बिना देरी के देखा जाना चाहिए।

इस बारे में समिति ने मंत्रालय से एक विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब की है। PMMMNMTT (पंडित मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड ट्रेनिंग) योजना पर समिति ने विभाग के रवैये को उदासीन करार दिया है।

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