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संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरू, मोदी सरकार को इन मुद्दों पर घेरेगा विपक्ष

संसद का 15 दिसंबर से शुरू हो रहा शीतकालीन सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। मोदी सरकार को विपक्ष ने घेरने के लिए नई रणनीति बनाई है।

संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरू, मोदी सरकार को इन मुद्दों पर घेरेगा विपक्ष

संसद का 15 दिसंबर से शुरू हो रहा शीतकालीन सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है जहां विपक्ष की ओर से सरकार को गुजरात चुनाव की पृष्ठभूमि में सत्र में विलम्ब करने से जुड़े विषय, जीएसटी, नोटबंदी, राफेल मुद्दा, किसानों से जुड़े विषय समेत कई समसामयिक मुद्दों पर घेरने का प्रयास किया जा सकता है।

संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने 14 दिसंबर को संसद की लाइब्रेरी में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले ये बैठक होगी।

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विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए और नियमों के तहत चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से अपील है कि वे महत्वपूर्ण विधेयकों पर उपयोगी और रचनात्मक बहस में सहयोग करें और संसद के दोनो सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना सुनिश्चित करें।

इससे पहले संसद सत्र में विलंब को लेकर विपक्ष की तीखी आलोचना झेल रही सरकार ने शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से बुलाने की घोषणा की थी जो 5 जनवरी तक चलेगा।

सत्र के दौरान तीन विधेयक लाए जाने का प्रस्ताव किया गया है जिसमें वस्तु एवं सेवा कर (राज्य़ों को मुआवजा) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर विधेयक लाने का प्रस्ताव है। यह अध्यादेश 2 सितंबर 2017 को जारी किया गया था।

इसके अलावा ऋण शोधन और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर भी विधेयक लाने का प्रस्ताव है। सरकार ने भारतीय वन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर भी विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है।

सरकार का तीन तलाक पर लगी रोक को कानूनी जामा पहनाने के लिए भी विधेयक पेश करने, पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाले संविधान संशोधन विधेयक पुन: लाने का इरादा है।

सत्र के दौरान नागरिकता संशोधन विधेयक 2016, मोटरवाहन संशोधन विधेयक 2016, ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण विधेयक को पारित कराने पर भी जोर दिया जा सकता है।

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इस सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा नोटबंदी को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमलावर होगी। कांग्रेस शुरुआत से ही जीएसटी एवं नोटबंदी को लागू करने के फैसले को जल्दबाजी में लिया गया कदम बताती आई है।

संसद सत्र के दौरान ही 18 दिसंबर को गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम आने हैं। गुजरात के मोदी के गृह प्रदेश होने के कारण चुनाव परिणाम का भी सत्र पर असर देखा जा सकता है।

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