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संसद में विपक्ष ने लगाए मोदी विरोधी नारे, चलाये शब्दों के तीखे बाण

विपक्ष के हंगामे के बाद दोनों सदनों को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

संसद में विपक्ष ने लगाए मोदी विरोधी नारे, चलाये शब्दों के तीखे बाण
नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के जारी तकरार के कारण सोमवार को भी दोनों सदनों की कार्यवाही पटरी पर नहीं आ सकी। मसलन दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। मोदी सरकार की नोटबंदी के मुद्दे पर घेराबंदी करने के किसी भी मौके को विपक्ष गंवाना नहीं चाहता और इसी कारण संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरूआत भी हंगामे के साथ शुरू हुई। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे बरपते रहे हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी और दोपहर बाद पूरे दिन के लिए कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। गौरतलब है कि इस सत्र के पहले तीन दिन की कार्यवाही भी इस मुद्दे की भेंट चढ़ चुकी है।
पीएम के खिलाफ हुई नारेबाजी
लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा स्थगन प्रस्ताव की इजाजत नहीं दिए जाने पर विपक्षी सदस्य शोर शराबा और नारे लगाते हुए सदन के बीचोंबीच आ गए। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य वित्तीय आपातकाल लिखे नारों वाली तख्तियां हाथ में थामे अध्यक्ष के आसन के समीप आ गए। हंगामे के बीच भी अध्यक्ष ने प्रश्नकाल की कार्यवाही जारी रखी। इस दौरान कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस,अन्नाद्रमुक, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल तथा वाम दलों के साथ ही विपक्ष के सभी सदस्य लगातार हंगामा करते हुए प्रधानमंत्री होश में आओ, मोदी सरकार हाय-हाय, अमीरों की सरकार हाय-हाय, गली-गली में शोर है और चैड़ी छाती कहां गयी जैसे नारे लगाते रहे।
हंगामे के बीच पेश हुए विधेयक
लोकसभा में एक बार स्थगन के बाद जैसे ही बारह बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सदस्य नोटबंदी पर चर्चा कराने को लेकर फिर से हंगामा करने लगे। इसी शोर-शराबे के बीच रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने पुखरायाँ रेल हादसे पर अपना बयान पढ़ा। तो वहीं लोकसभा अध्यक्ष ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। यही नहीं हंगामे के दौरान ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्ढा ने सरोगेसी विनियमन विधेयक और केंद्रीस सड़क परिवहन व जहारानी राज्यमंत्री मनसुख लाल मांडविया ने नावधिकरण समुद्री दावा की अधिकारिता एवं निपटारा विधेयक पेश कर दिया। हालांकि इन बिलों पर चर्चा होना बाकी है।

रेल हादसे पर दुख
संसद के दोनों सदनों में सोमवार को कानपुर के पास रेल दुर्घटना में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। लोकसभा में अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही शुरू होने पर शोक सन्देश पढ़ा जबकि राज्यसभा में सभापति हामिद अंसारी ने शोक सन्देश पढ़ा। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नोटबंदी को लेकर चल रहे हंगामे के बीच रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि रेल दुर्घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस हादसे की फॉरेंसिक जांच होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। आपको बता दें कि इस हादसे में अब तक 147 लोगों की मौत हो चुकी है।
सरकार ने भी किया पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि भ्रष्टाचार, कालाधन और जाली नोट को खत्म करने और इसके ऊपर पनपने वाले आतंकवाद को खत्म करने वाले कदम को पूरे देश में एक स्वर से समर्थन मिला है। विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार इस विषय पर नियम 193 के तहत चर्चा कराने को तैयार हैं। इसके विपरीत विपक्षी सदस्य हंगामा करने की रणनीति पर कायम रहे और कार्यस्थगित करके चर्चा कराने की मांग करते रहे।
विपक्ष ने बनाई रणनीति
सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों की विपक्षी पार्टियों ने बैठक की। इसी के तहत सोमवार सुबह बैठक में विपक्ष ने तय किया कि वे इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव पर जोर देना जारी रखेंगे। विपक्षी दलों की इस बैठक में ये भी सुझाव आये कि सदन में किसी दूसरे नियम के तहत चर्चा शुरू करायी जा सकती है जिसमें मतविभाजन का प्रावधान नहीं हो और इस बारे में एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया जाए। बैठक में इस मुद्दे पर धरना के बाद राष्ट्रपति से मिलने के बारे में भी चर्चा हुई लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका।

राज्यसभा में कांग्रेस का आरोप
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 2000 रुपए के नोट जारी करते समय कानून का पालन नहीं करने का आरोप लगाया और इस मामले को संसद के भीतर एवं बाहर उठाने का संकल्प लिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने देश को वित्तीय अराजकता की स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि 2000 रुपए के नोटों को लाना एक अवैध कृत्य है क्योंकि नए नोट छापने के लिए आरबीआई अधिनियम के तहत जो अधिसूचना जारी करना आवश्यक होता है, वह जारी नहीं की गई और कानून के तहत अनिवार्य बात को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने नोट बदलवाने वालों की उंगलियों पर अमिट स्याही लगाए जाने के सरकार के कदम की भी आलोचना की। कांग्रेस ने कहा कि एकजुट विपक्ष इस मामले को जन आंदोलन का विषय बनाने के अलावा संसद में जोरदार तरीके से उठाएगा।

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