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वित्त वर्ष 2017-18 में 7.5% की वृद्धि एक चुनौती: आर्थिक सर्वे

फरवरी से अब तक रुपया करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हो चुका है।

वित्त वर्ष 2017-18 में 7.5% की वृद्धि एक चुनौती: आर्थिक सर्वे

केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली की ओर से आज संसद में पेश किये गये आर्थिक सर्वेक्षण 2017 में कहा गया है कि मार्च 2017 के आखिर तक नकदी की आपूर्ति के सामान्‍य स्‍तर पर पहुंच जाने की संभावना है।

जिसके बाद अर्थव्‍यवस्‍था में फिर से सामान्‍य स्थिति बहाल हो जाएगी। अत: वर्ष 2017-18 में जीडीपी वृद्धि दर 6.75 प्रतिशत से लेकर 7.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।

वित्त वर्ष 2016-17 में यह 3.5 प्रतिशत था यह पहला अवसर है जब सरकार ने किसी वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट दो बार पेश की है। बता दें कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के लिए पहला आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी 2017 को लोकसभा में पेश किया गया था, क्योंकि इस बार आम बजट फरवरी के शुरू में ही पेश किया गया था।

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सर्वेक्षण में कहा गया है कि ‘अर्थचक्र के साथ जुड़ी परिस्थितियां’ संकेत दे रही हैं कि रिजर्व बैंक की नीतिगत दरें वास्तव में स्वाभाविक दर आर्थिक वृद्धि की वास्तविक दर से कम होनी चाहिए। निष्कर्ष साफ है कि मौद्रिक नीति नरम करने की गुंजाइश काफी अधिक है।

इसके साथ-साथ बैकों और कंपनियों की बैलेंस शीट की समस्याओं को दूर करने के लिए दिवाला कानून जैसे सुधारवादी कदमों से अर्थव्यवस्था को अपनी पूरी क्षमता का लाभ उठाने का अवसर तेजी से हासिल करने में मदद मिलेगी।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आईआईपी ऋृण प्रवाह, निवेश और उत्पादन क्षमता के दोहन जैसे अनेक संकेतकों से पता लगता है कि 2016-17 की पहली तिमाही से वास्तविक आर्थिक वृद्धि में नरमी आई है और तीसरी तिमाही से यह नरमी अधिक तेज हुई है।

फरवरी से अब तक रुपया करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हो चुका है। इसमें कहा गया है कि सरकार और रिजर्व बैंक ने बैलेंस शीट की चुनौती दूर करने के लिए कई कदम उठाये हैं। जिससे अल्पावधि में बाजार की धारणा मजबूत हुई है।

जीएसटी के लागू किये जाने के बाद चेकपोस्टों के खत्म होने और माल ढुलाई आसान होने से भी आर्थिक गतिविधियों को अल्पावधि में मदद मिलेगी। सर्वेक्षण में कहा गया है कि 6.75 से 7.5 प्रतिशत के बीच की अनुमानित आर्थिक वृद्धि दर के उपरी दायरे को हासिल करने की उम्मीद कमतर हुई है।

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