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चाबहार बंदरगाह परियोजना से पाक को झटका, चीन बेचैन

ईरान और भारत के बीच कई क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर के द्विपक्षीय समझौते भी किये जा चुके हैं।

चाबहार बंदरगाह परियोजना से पाक को झटका, चीन बेचैन
नई दिल्ली. भारत के ईरान और अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते दोस्ताना सबन्ध पाकिस्तान को रास नहीं आ रहे हैं। खासकर ईरान में प्रस्तावित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर वह सबसे ज्यादा बेचैन है, लेकिन पाक के नापाक कारनामों से उसके पडोसी होने के बावजूद ईरान और अफगानिस्तान ने भारत की पाक को अलग-थलग करने के समर्थन में पाकिस्तान को चाबहार परियोजना के मद्देनजर गहरा झटका देने की तैयारी कर ली है। भारत ने मौजूदा तनाव के बीच पकिस्तान को एक और गहरा सदमा पहुंचाने की तैयारी में लंबित पड़ी चाबहार बंदरगाह परियोजना को आगे बढ़ाने की नीति तेज कर दी है। दरअसल हाल ही में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के निमंत्रण पर अफगानिस्तान के परिवहन मंत्री डा. मोहमदुल्लाह बताश और ईरान के सड़क एवं शहरी विकास मंत्री डा. अब्बास अहमद अखौंडी भारत पहुंचे थे, जहां त्रिपक्षीय समीक्षा बैठक करके चाबहार परियोजना के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई गई।
कार्यान्वयन की दिशा में परिवहन पारगमन
मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते के अमल पर भी चर्चा की गई। चाबहार परियोजना पर इसी साल पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार तीनों देशों के बीच हुई चर्चा के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हुए एक केंद्र के रूप में चाबहार परियोजना से जुड़े मुद्दों पर फैसला किया गया कि चाबहार बंदरगाह को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए इसी साल के भीतर एक कनेक्टिविटी समारोह का आयोजन किया जाएगा। ताकि तीनों देश समझौते के अनुमोदन पर आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करके इस परियोजना को शुरू किया जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में परिवहन पारगमन, बंदरगाह, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और कौंसुलर मामलों से संबंधित प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा। वहीं एक महीने के भीतर चाबहार में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक विशेषज्ञ स्तरीय बैठक भी होगी, जिसमें तीनो देशों की आर्थिक वृद्धि और विकास से व्यापार का पुनर्गठन होगा। गौरतलब है कि इस समझौते में भारत और अफगानिस्तान के अधिकार क्षेत्रों में सामानों तथा यात्रियों के लाने-ले जाने तथा आने-जाने के लिए आवश्यक और कानूनी रूपरेखा का प्रावधान है।
इसलिए चिढ़ा है पाकिस्तान
भारत जब भी किसी पड़ोसी देश या क्षेत्रीय ताकत से दोस्तना संबंध बनाता है या रणनीतिक सहयोग करता है, तो उससे पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ जाती है। खासकर भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिए व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना से पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग पड़ने का खतरा नजर आ रहा है। मसलन भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में मजबूत प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं जिसकी दो तीन वजह पाकिस्तान को ज्यादा परेशान कर रही हैं। अभी तक पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचने वाली भारतीय चीजें चाबहार परियोजना के पूरा होते ही ईरानी बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान तक सीधे पहुंचना शुरू हो जाएंगी। इसी परियोजना के जरिए भारतीय सामान सेंट्रल एशिया और पूर्वी यूरोप तक सामान भेज सकता है। पाकिस्तान को यह खतरा है कि व्यापार में भारत-ईरान-अफगानिस्तान का सहयोग, रणनीति और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगा और इसके पाकिस्तान के लिए नकारात्मक नतीजे निकलेंगे।
चीन भी है बेचैन
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को जहां पाकिस्तान अपने लिए खतरा मान रहा है, क्योंकि इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान को ठेंगा दिखाते हुए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचेगा। ऐसे में पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने के बाद चीन ने भी प्रतिद्वंद्वता जाहिर करते हुए पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट बनाना शुरू किया है। दरअसल चीन ग्वादर के सहारे अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है। भारत की पाक को सबक सिखाने के लिए ऐसी भी योजना है कि मध्य एशिया से पाइप लाइन के जरिए तेल और गैस भी भारत तक आए, लेकिन पाकिस्तान के अविश्वास के कारण पाइपलाइन शुल्क और उसकी सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है। ऐसे में चाबहार के जरिए र्इंधन जहाजो के जरिए र्इंधन पहुंचाने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह भी हुआ निर्णय
इस समीक्षा बैठक के दौरान अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) बनाने पर भी भी भारत और ईरान ने बल दिया। वहीं निर्णय लिया गया कि चाबहार-जाहेदन रेलवे और चाबहार फ्री जोन में निवेश सहित अन्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लायी जाए, बल्कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से संबंधित नई परियोजनाओं के बारे में भी विचार-विमर्श किया। भारत इस बंदरगाह में भारत ने चाबहार में करीब 10 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुका और 50 करोड़ डॉलर के और निवेश करने वाला है। इसके अलावा ईरान और भारत के बीच कई क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर के द्विपक्षीय समझौते भी किये जा चुके हैं।
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