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उरी हमले के बाद पाकिस्तान ने तोड़ा 110 बार संघर्षविराम

संघर्षविराम उल्लंधन की ज्यादातर घटनाएं सेना की 15 और 16वीं कोर में हुई हैं।

उरी हमले के बाद पाकिस्तान ने तोड़ा 110 बार संघर्षविराम
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नई दिल्ली. 18 सितंबर को भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे उरी के सैन्य बिग्रेड मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले के बाद से लेकर आज तक पाकिस्तानी सेना ने कुल 110 बार एलओसी पर संघर्षविराम समझौते का उल्लंधन कर भारतीय सेना की चौकियों को निशाना बनाया है। इस दौरान सेना के पांच जवान शहीद हुए हैं। संघर्षविराम उल्लंधन का यह आंकड़ा 18 सितंबर से लेकर 6 नंवबर तक का है। इसके अलावा इस वर्ष जनवरी से लेकर सितंबर तक संघर्षविराम की घटनाआें के आंकड़ें की बात करें, तो इस दौरान कुल 41 बार ही पाक ने सीजफायर तोड़ा था। लेकिन उड़ी के बाद 28-29 सितंबर की देर रात भारतीय सेना द्वारा एलओसी लांघकर आतंकी लांच पैड्स पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाक सेना की बौखलाहट में इजाफा हुआ है। इसका भारतीय सेना माकूल जवाब दे रही है। संघर्षविराम उल्लंधन के दौरान हुई पांच जवानों की शहादत में 1 मच्छल, 1 तंगधार, 1 पूंछ और 2 बींबर गली सेक्टर में पाक सेना की फायरिंग के दौरान निशाना बने थे।
फायरिंग के केंद्र में 15, 16वीं कोर
यहां सरकार के खुफिया ब्यूरो के सूत्रों ने बताया कि एलओसी पर की गई संघर्षविराम उल्लंधन की ज्यादातर घटनाएं सेना की 15 और 16वीं कोर में हुई हैं। इसमें उड़ी, कुपवाड़ा, तंगधार, केरन, मच्छल, गुरेज, पूंछ, मेंढर, नौशेरा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आइबी) से कुछ दूरी पर एलओसी की शुरूआत वाला अखनूर का इलाका भी शामिल है। दोनों इलाके जम्मू-कश्मीर में फैली पीर पंजाल की पहाड़ी के उत्तर और दक्षिण में फैला हुआ है।
आइबी पर हिंदू जनसंख्या टारगेट
पाकिस्तानी सेना द्वारा इस दौरान ज्यादातर फायरिंग आईबी से सटे घने आबादी वाले इलाकों की ओर की जा रही है। इसका मकसद यहां मौजूद ज्यादा से ज्यादा आबादी को नुकसान पहुंचाने की बनी हुई है। सूत्र कहते हैं कि यहां भीषण गोलीबारी किए जाने के पीछे पाक सेना का उद्देश्य हिंदू आबादी को निशाना बनाना है। जम्मू से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हिंदू बड़ी तादाद में रहते हैं। इसकी दूसरी ओर एलओसी में आमतौर पर फायरिंग के दौरान आबादी वाले इलाकों को पाकिस्तानी सेना कम ही निशाना बनाती है। क्योंकि वो कश्मीरी मुस्लिम हैं।
भविष्य की योजना
भविष्य में सेना और पेरामिलिट्री फोर्से ने एलओसी से लेकर आईबी में दुश्मन की कार्रवाई के अनुरूप ही प्रतिक्रिया करने का निर्णय लिया है। जहां तक हो सके भीषण गोलीबारी से बचते हुए तनाव कम करने की कवायद की ओर भी ध्यान दिया जा सकता है।
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