Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

''पद्मावत'' रिव्यूः इन 5 कारणों को पढ़ने के बाद खुद को रोक नहीं पाएंगे फिल्म देखने से

मलिक मोहम्मद जायसी की कृति ‘पद्मावत’ पर आधारित भंसाली की ये अब तक की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी फिल्म है।

2 घंटे 45 मिनट की इस फिल्म ने कहीं भी कोई ऐसा दृश्य या संवाद नहीं है, जिससे किसी की भावना को ठेस पंहुचे। फिल्म में इतिहास को बिना तोड़े-मरोड़े पेश किया गया है। कलाकार रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर का अभिनय बेहतरीन है। मलिक मोहम्मद जायसी की कृति ‘पद्मावत’ पर आधारित भंसाली की ये अब तक की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी फिल्म है।

इसे भी पढ़ेंः पद्मावत विवाद: दहशत के माहौल में बच्चों को स्कूल छोड़ने पहुंचे अभिभावक, गुरुग्राम में कई स्कूल बंद

संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' को लेकर विवाद रूकने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच फिल्म आज रिलीज भी हो गई। इस फिल्म को पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में बैन कर दिया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे देशभर में दिखाए जाने का आदेश दिया।

फिल्म रिव्यू

फिल्म में राजपूतों की गरिमा और मान सम्मान को ठेस पहुंचाता एक भी दृष्य नहीं है। शायद विरोध करने वालों ने देखे बिना ही ज्यादा विरोध करना शुरू कर दिया। फिल्म के अंत में आप राजपूती गरिमा, वीरता और आन-बान और शान को सलाम करते हुए बाहर निकलते हैं।

संजय लीला भंसाली हमेशा से ही लार्जर देन लाइफ सिनेमा बनाते रहे हैं। लेकिन पद्मावत उनके जीवन की सबसे बड़ी फिल्म है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में इतनी भव्य फिल्म अभी तक शायद ही कोई हो। शायद पहली बार एेसी फिल्म देखने मिलेगी। इतनी भव्यता में भी संजय लीला भंसाली हर एक दृश्य की छोटी-छोटी डिटेल्स पर बारीकी से काम करते नज़र आते हैं।

सभी कलाकारो का दमदार किरदार

दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मिनी के किरदार को बखूबी निभाया है। फिल्म के हर सीन में वो एक महारानी की तरह हीं दिखती है, वो हर दृष्य में रानी पद्मीनी ही लगती हैं। वही महारावल रतन सिंह बने शाहिद कपूर ने इस किरदार के लिए जमकर मेहनत की जो पर्दे पर साफ नज़र आती है। लेकिन, इन सब में उभर कर आता है खलनायकी किरदार याने अलाउद्दीन खिलजी का।

रणवीर सिंह को अभी तक नायक के किरदारों में देखा और पसंद किया है। पहली बार वो एक खलनायकी किरदार में हमारे सामने आए हैं और उन्होंने किस ढंग से खलनायक को गढ़ा है वो वाकई तारीफे काबिल है।

इन तीनों मुख्य पात्रों के अलावा वेटरन एक्टर रज़ा मुराद की अदायगी भी अब्बल दर्जे की है। जलालुद्दीन खिलज़ी के किरदार को उन्होंने अपने अंदाज़ में जीवंत कर दिया है! साथ ही मेह्रुनिषा के किरदार में अदिति राव हैदरी ने भी कमाल का प्रदर्शन किया है। सभी किरदार अपने लिए एक अलग ही आभार रचते हैं और उसमें सफल भी नज़र आते हैं!

बेहतरीन एडिटिंग और सिनेमेटोग्राफी

फिल्म में भंसाली का जबरदस्त डायरेक्शन तो है ही। वहीं, फिल्म की भव्यता को चार चांद इसकी एडिटिंग और सिनेमेटोग्राफी जैसी चीजें लगाती हैं। साथ ही कॉस्ट्यूम पर भी जबदस्त काम किया गया है जो फिल्म की भव्यता और बढ़ा देता है।

करणी सेना पैदा किया डर का माहौल

फिल्म रिलीज होने के बाद करणी सेना एक्सपोज हो गई है। समझ नहीं आ रहा कि वे लोगों को क्यों डरा रहे हैं? इससे पहले कि ये सेना अपना विस्तार करें, हमें इसके खिलाफ खड़ा होना होगा। राजपूत जो पद्मावति की पूजा करते है, इस फिल्म के बाद पद्मावती के प्रति सम्मान बहुत बढ़ेगा।

इन वजहों से देखें 'पद्मावत'

सिर्फ राजपूत ही नहीं, हर भारतीय, इस फिल्म के हर दृश्य में खुद को गौरवान्वित महसूस करेगा, कि इस देश में रानी पद्मिनी जैसी वीरांगना ने जन्म लिया, जिसने साबित किया कि राजपूती कंगन में भी उतनी ही ताकत है, जितनी की राजपूती तलवार में... राजा रावल रतन सिंह जो अपने सिद्धांतों और राजधर्म के लिए कभी नीति और धर्म से नहीं डिगा, भले ही उसकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ी... और गोरा-बादल जिसने अपनी देशभक्ति और राजपूती शान के लिए अपनी जान का बलिदान दिया, और खास तौर पर गोरा सिंह, जिसका सर कटने के बाद भी उसकी तलवार चलती रही।

फिल्म पद्मावत देखकर राजपूतो के प्रति सम्मान बढ़ेगा। खिलजी के प्रति नफरत है, लेकिन रणबीर ने अपने इस किरदार को बखूबी निभाया है। फिल्म में आमिर खुसरो को चापलूस किस्म का आदमी दिखा गया है। फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। जिन काल्पनिक दृश्यों की बात सोशल मीडिया में की जा रही है, फिल्म में ऐसा कोई भी दृश्य नहीं है। लोगों ने बेवजह ही बवाल मचा रखा है।

फिल्म में राजपूतों की वीरता, युद्ध के कठिन क्षणों में भी नीति सम्मत, धर्म के पथ पर उनका बना रहना, और अपनी दुश्मन के सामने अपना सर कभी ना झुकने देना भले ही उसके लिए जान देनी पड़े। दूसरी और अलाउद्दीन खिलजी को एक दरिंदे का पागलपन, जो अपनी जीत और हवस के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकता है। जिसके शब्दकोश में नीति और धर्म है नहीं, जो सत्ता के लिए अपने चाचा का कत्ल करता है, अपनी बीवी को कारागार में बंद करता है, जो भरोसे के काबिल नहीं, जो एक जानवर है, लेकिन इंसानी जिस्म में, यानी अलाउद्दीन खिलजी।

सिर्फ राजपूत ही नहीं, हर भारतीय, इस फिल्म के हर दृश्य में खुद को गौरवान्वित महसूस करेगा, कि इस देश में रानी पद्मिनी जैसी वीरांगना ने जन्म लिया, जिसने साबित किया कि राजपूती कंगन में भी उतनी ही ताकत है, जितनी की राजपूती तलवार में... राजा रावल रतन सिंह जो अपने सिद्धांतों और राजधर्म के लिए कभी नीति और धर्म से नहीं डिगा, भले ही उसकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ी... और गोरा-बादल जिसने अपनी देशभक्ति और राजपूती शान के लिए अपनी जान का बलिदान दिया, और खास तौर पर गोरा सिंह, जिसका सर कटने के बाद भी उसकी तलवार चलती रही।

Share it
Top