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राहुल को नहीं लिया था हिरासत में, खुद बैठे थेे जिप्सी मेंः पुलिस

राहुल ने सरेंडर करने की बात कही और पुलिस से कहा कि मुझे अरेस्ट कर लो

राहुल को नहीं लिया था हिरासत में, खुद बैठे थेे जिप्सी मेंः पुलिस
नई दिल्ली. दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'वन रैंक वन पेंशन' को लेकर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल के सुसाइड के बाद हुए राजनीतिक संग्राम में एक नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद दिल्ली पुलिस ने की है। राम किशन के आत्महत्या के बाद गुरुवार का दिन दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा मशक्कत भरा साबित हुआ।
राहुल गांधी गुरुवार शाम तो 6 से 7 बजे के बीचे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंचे। वहां पहुंचने के कुछ मिनट बाद ही राहुल गांधी ने पुलिस को सूचना दी कि वे इंडिया गेट तक कैंडल लाइट मार्च निकालेंगे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस पर ऐतराज जताया और कहा कि प्रदर्शन की अनुमति केवल जंतर-मंतर पर ही है। इसके बाद राहुल ने सरेंडर करने की बात कही और पुलिस से कहा कि मुझे अरेस्ट कर लो।
पुलिस ने बताया कि जब पुलिस ने गिरफ्तार करने से मना कर दिया तो राहुल खुद पुलिस जिप्सी में जाकर बैठ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की जिप्सी को घेर लिया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
कुछ पत्रकारों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन एसपीजी ने उन्हें वहां से हटा दिया। आखिरकार पुलिस ने इसमें दखल दी और स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी जैसे ही जंतर-मंतर पर पहुंचे, उन्हें जबरन पुलिस जिप्सी में बैठा लिया गया।
साथ ही पुलिस का कहना है कि उन्होंने राहुल को घर पर छोड़ने का फैसला किया था। वे उसे फिरोजशाह रोड़ लेकर गए और वहां पर उतर जाने के लिए कहा। लेकिन राहुल गांधी ने उतरने के लिए मना कर दिया। तभी उन्होंने कुछ कॉल किए और उसके बाद दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस जिप्सी को घेर लिया और टायरों की हवा निकाल दी। इस दौरान एसपीजी ने दखल दी और राहुल को दूर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दावा है कि राहुल गांधी को पहले पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ले जाया गया और उसके बाद फिरोजशाह रोड़ और आखिर में तुगलक रोड़ पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां पर उन्हें 9 बजे छोड़ दिया गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पुलिस की कार का जनपथ मेट्रो स्टेशन तक पीछा किया, लेकिन बाद में कार की स्पीड बढ़ा दी गई।
लेकिन कहानी में रोचक मोड़ तब आया, जब राहुल गांधी के साथी कनिष्क सिंह ने पीसीआर को कॉल की और कहा कि कुछ पुलिसवालों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का अपहरण कर लिया। इस कॉल के बाद पुलिस में खलबली मच गई और कुछ पीसीआर वैन उन्हें देखने के लिए निकल गई।
सिंह ने इस बारे में एफआइआर दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायत भी की। बाद में सीनियर अधिकारियों ने पाया कि राहुल गांधी सुरक्षित हैं। पुलिस बयान में कहा गया, ‘राहुल गांधी को टॉलस्टॉय मार्ग पर उस वक्त हिरासत में लिया गया, जब वे बार-बार मना करने के बावजूद भी इंडिया गेट की तरफ कैंडल लाइट मार्च कर रहे थे। उन्हें अन्य नेताओं के साथ तुगलक रोड़ पुलिस स्टेशन लाया गया था।’
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