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अब कॉल कटने पर लगेगा इतने लाख का जुर्माना

ट्राई ने कॉल ड्राप पर सख्त रुख अपनाते हुए दूरसंचार सेवाएं देने वाली कंपनियों पर कॉल ड्रॉप करने पर 10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है।

अब कॉल कटने पर लगेगा इतने लाख का जुर्माना

ट्राई ने कॉल ड्राप पर सख्त रुख अपनाते हुए दूरसंचार सेवाएं देने वाली कंपनियों पर कॉल ड्रॉप करने पर 10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है।

मौजूदा नियमों के मुताबिक कॉल ड्रॉप पर दूरसंचार कंपनियों से अधिकतम 50 हजार रुपए का जुर्माना वसूला जाता है।

दूरसंचार नियामक संस्था ट्राई द्वारा कॉल ड्रॉप समस्या को दूर करने के लिए शुक्रवार को जारी सख्त दिशानिर्देशों के अनुसार लगातार तीन तिमाही तक बेंचमार्क का उल्लंघन करने पर अधिकतम जुर्माना वसूला जाएगा।

इस बेंचमार्क के तहत सामान्य समय में 2 फीसदी से ज्यादा और विशेष परिस्थितियों में या व्यस्त समय में 3 फीसदी से ज्यादा कॉल ड्रॉप होने पर ही जुर्माना का नियम लागू होगा।

नए दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी देते हुए ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने बताया कि न्यूनतम जुर्माना 1-5 लाख रुपए के बीच होगा।

यह श्रेणीबद्ध जुर्माना है जो नेटवर्क की कार्यकुशलता पर निर्भर करेगा।

ट्राई के कार्यकारी सचिव एसके गुप्ता के अनुसार अगर दूरसंचार ऑपरेटर लगातार तिमाही में कॉल ड्रॉप बेंचमार्क का उल्लंघन करता है तो जुर्माना डेढ़ गुना बढ़ जाएगा और लगातार तीसरे महीने में भी यह उल्लंघन जारी रहता है तो जुर्माना दोगुना हो जाएगा, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए होगी।

इससे पहले क्वालिटी ऑफ सर्विस रूल्स के तहत कॉल ड्रॉप बेंचमार्क के हर उल्लंघन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगता था। इसमें संशोधन के साथ ही ट्राई ने कॉल ड्रॉप को मापने के लिए टेलीकॉम सर्किल के बजाय मोबाइल टावर को आधार बनाया है। नए नियमों के अनुसार जुर्माना तय करते समय नेटवर्क को प्रभावित करने वाले तात्कालिक कारणों और नेटवर्क के भौगोलिक विस्तार को भी ध्यान में रखा जाएगा।

नए दिशानिर्देशों के तहत ट्राई ने रेडियो-लिंक टाइम आउट टेक्नोलॉजी (आरएलटी) का भी बेंचमार्क तय कर दिया है। कॉल ड्रॉप को छुपाने के लिए दूरसंचार कंपनियां आरएलटी की आड़ लेती रही हैं। आरएलटी का इस्तेमाल ग्राहक के कॉल को एक मोबाइल टावर से दूसरे टावर से जोड़ने के लिए किया जाता है।

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