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पोखरण परीक्षण ने बदल दी दुनिया में भारत की छवि

11 मई से लेकर 13 मई तक पोखरण में लगभग 5 बार परमाणु परीक्षण किए गए।

पोखरण परीक्षण ने बदल दी दुनिया में भारत की छवि

भारत 15 अगस्त पर आजादी के 70 साल पूरे होने का जश्न मनाने जा रहा है। इन 70 सालों में भारत ने दुनिया में अपनी एक अलग छवि बनाई है। इतने सालों में भारत में हर स्तर पर अपने को बदला और आगे बढ़ता रहा।

आज हम बात कर रहे हैं भारत में हुए पोखरण परीक्षण की, जिसने एशिया ही नहीं दुनिया में भारत की छवि को बदल कर रख दिया। 11 मई, 1998 को राजस्थान के पोखरण में भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण अटल सरकार के दौरान किया गया था। बता दें कि इससे पहले इसका पहला परीक्षण 18 मई, 1974 को किया गया था।

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तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में कलाम और उनकी टीम ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन शक्ति रखा गया था।

इस ऑपरेशन की सबसे खास बात ये थी कि इसकी भनक दुनिया को ही नहीं बल्कि अटल सरकार के मंत्रियों को भी नहीं थी। लेकिन जब इस ऑपरेशन को पूरा कर परीक्षण का वक्त आया तो पूरी दुनिया हिल गई।

जानकारी के लिए बता दें कि 11 मई से लेकर 13 मई तक पोखरण में लगभग 5 बार परमाणु परीक्षण किए गए। जिससे पुरी दुनिया हिल गई और तभी अमेरिका ने भारत के खिलाफ कड़ा कदम उठाया।

लेकिन इस परीक्षण ने भारत को उन परमाणु देशों की श्रेणी में लाकर रख दिया, जिसकी भारत ने कभी कामना की होगी। पोखरण परीक्षण का उद्देश्य भारत को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया गया था।

भारत ने पहले ही कहा था कि हमारा परमाणु परीक्षण शांतिपूर्ण है, इसका उद्देश्य अपने आपको निर्भर बनाना और परमाणु शक्तियों को बताना की भारत भी उनकी चुनौतियों का जवाब दे सकता है। बता दें कि 11 मई के दिन को इतिहास में भार टेक्नोलॉजी डे के रूप में मनाता है।

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कहते हैं कि 1995 का चुनाव अटल बिहारी सरकार ने अपने चुनावी वादे में इस बात का जिक्र किया था कि वो भारत को परमाणु देशों के श्रेणी में लाकर खड़ा कर देगा। चुनाव जीतने के दो महीने के अंदर ही अटल सरकार ने अपना वादा पूरा कर दिया और भारत की परमाणु शक्ति के साथ ही टेक्नोलॉजी में भी बदलाव के रास्ते खोल दिए।

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