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एनएसजी और सीआईएसएफ को मिल सकती है संदिग्ध ड्रोन मार गिराने की अनुमति

यह बात गृह सचिव की इंडियन एअर फोर्स, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, सीआईएसएफ और दूसरी ऑर्गनाइजेशंस के साथ हुई पिछली कई मीटिंग्स में उठ चुका है।

एनएसजी और सीआईएसएफ को मिल सकती है संदिग्ध ड्रोन मार गिराने की अनुमति
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नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) और इंडस्ट्रियल सिक्युरिटी फोर्स सीआईएसएफ को अनजान या संदिग्ध ड्रोन या ग्लाइडर को मार गिराने की अनुमति मिल सकती है।

भारत सरकार इस तरह की नई पॉलिसी पर काम कर रही है, जिसे फाइनल किया जाना है।

गृह मंत्रालय अधिकारी के मुताबिक, आतंकी हमला करने में सक्षम ड्रोन, ग्लाइडर्स जैसे अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) से निपटने के लिए और पायलट लेस और लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को संचालित करने के लिए जल्द ही एक नीति लाई जाएगी।

कब उठा ये मसला

अधिकारी के मुताबिक, ये मसला गृह सचिव की इंडियन एअर फोर्स, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, सीआईएसएफ और दूसरी ऑर्गनाइजेशंस के साथ हुई पिछली कई मीटिंग्स में उठ चुका है। ड्रोन नीति का मसौदा अंतिम चरण में है।

नीति में यूएवी और लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स पर नियंत्रण करने पर फोकस रहेगा। ये इसी महीने पब्लिक डोमेन में रखी जा सकती है, ताकि सुरक्षा से जुड़े दूसरे लोग इस बारे में अपने कमेंट्स दे सकें।

सीआईएसएफ-एनएसजी का क्या रोल होगा

अधिकारी के मुताबिक, संभव है कि एनएसजी और सीआईएसएफ को ऐसे अधिकार दिए जाएं, जिनमें अगर कोई यूएवी संदिग्ध और खतरा लगता है तो उसे मार गिराया जा सके।

सीआईएसएफ-एनएसजी को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम से लैस किया जा सकता है। इसमें राडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर और डिटेक्टर की सुविधाएं हैं।
नीति में ऐसे रक्षात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे ये निश्चित हो सके कि आतंकी ग्रुप यूएवी का इस्तेमाल गलत तरीके से ना कर सकें।
इस नीति पर काम तब शुरू हुआ,जब कुछ एयरपोर्ट्स और बॉर्डर पर ऐसे यूएवी ने ट्रैफिक को डिस्टर्ब किया और सुरक्षा के लिए खतरा बने।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, ये जरूरी हो गया है कि एयरपोर्ट्स जैसे संवेदनशील इलाकों में यूएवी का गलत तरीके से इस्तेमाल ना किया जा सके।
नीति में ऐसे प्रावधान होंगे, जिनके जरिए संदिग्ध यूएवी की पहचान की जा सके।
अधिकारी के मुताबिक, पॉलिसी में सुरक्षा के आलावा यूएवी के लिए लाइसेंस, इंटरनेशनल बॉर्डर पर उनके इस्तेमाल, देश के भीतर उनके इस्तेमाल की हिफाजत और डिजास्टर रिलीफ वर्क में इस्तेमाल करना भी है।
मौजूद वक्त में यूएवी को रेगुलेट करने के लिए कोई पॉलिसी नहीं है।
ऐसे किसी शख्स को सजा देने का कोई कानून अभी नहीं है, जो ड्रोन के जरिए शरारत करे। इसीलिए नई नीति लाई जा रही है।
एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा, एक बार कानून लागू होने के बाद इसमें बताया जाएगा कि सजा क्या होगा, जुर्माना क्या होगा और किसे ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस दिया जाएगा।

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