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पाक में बंद हुई जाली नोट छापने वाली प्रेस, घाटी में घटी हिंसा

घाटी में हिंसा की घटनाओं में 60 फीसदी की कमी हुई है।

पाक में बंद हुई जाली नोट छापने वाली प्रेस, घाटी में घटी हिंसा
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री के द्वारा नोटबंदी के ऐलान के बाद से सरकार ने देश में भ्रष्टाचार पर लगाम और फर्जी करंसी के खिलाफ जंग में बड़ी कामयाबी हासिल की है। नोटबंदी का ऐसा असर हुआ कि नक्सलियों के काफी पैसे भी डूब गए और साथ ही कश्मीर घाटी में आतंकवाद पर भी जोरदार वार हुआ है।
आतंकियों की फंडिंग पर कसा शिकंजा
नोटबंदी के बाद से देश की सुरक्षा में लगे जांच एजेंसियों ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है जिसमें यह जिक्र किया गया है कि दो अहम जाली नोट छापने वाली पाकिस्तानी प्रेस को मजबूरन बंद किया गया है। बीते 30 दिनों में नोटबंदी के असर की पड़ताल कर रही जांच एजेंसियों के मुताबिक, सरकार के इस फैसले से आतंकियों की फंडिंग पर शिकंजा कसा है।
घाटी में हिंसा की घटनाओं में 60 फीसदी की कमी
नोटबंदी की वजह से ही दिसंबर में घाटी में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा की घटनाओं में 60 फीसदी की कमी आई है। इस महीने यहां सिर्फ एक बम धमाका हुआ। इसके अलावा, नोटबंदी की वजह से नक्सली गतिविधियों पर भी चोट पहुंची है। वहीं, भारत में हवाला एजेंट्स के कॉल ट्रैफिक में भी 50 फीसदी की कमी आई है।
सुरक्षा फीचर्स के कारण जाली नोट के धंधे पर बुरा असर
जांच एजेंसियों के एक सीनियर सरकारी अफसकर के मुताबिक, नोट के डिजाइन में क्रांतिकारी बदलाव और नए सुरक्षा फीचर्स की वजह से सीमा के पार भी जाली नोट के धंधे पर बुरा असर पड़ा है। अफसर ने बताया, 'पाकिस्तान अपने क्वेटा स्थित सरकारी प्रेस और कराची के एक प्रेस में जाली भारतीय करंसी छापता रहा है। नोटबंदी के बाद, पाकिस्तान के पास जाली नोटों की दुकान बंद करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा। एजेंसियों की पड़ताल में यह पता चला है।'
बता दें कि 8 नवंबर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था। उन्होंने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। अपने संबोधन में उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए जाली नोटों के कारोबार पर लगाम कसे जाने की जरूरत पर जोर दिया था। अधिकारियों का कहना है कि भारत में चल रहे अधिकतर जाली नोट 500 और 1000 के ही हैं।
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